0-केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान बोले—गाँव भारत की आत्मा हैं, योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी; दो दिवसीय सम्मेलन में ग्रामीण विकास के नए रोडमैप पर होगा मंथन।
नई दिल्ली, 28 जून(आरएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन का रविवार को नई दिल्ली में शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तब तक पूरा नहीं हो सकता, जब तक देश के गाँव समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित नहीं बनते।
सम्मेलन के पहले दिन विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और सुधार पर विचार-विमर्श किया। दूसरे दिन सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री नीतिगत दिशा और साझा कार्ययोजना पर चर्चा करेंगे। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय राज्य मंत्री कमलेश पासवान और डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी भी उपस्थित रहे।
टीम इंडिया–टीम ग्रामीण विकास की भावना से होगा कार्य
अपने उद्घाटन संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह सम्मेलन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यहाँ कोई मुख्य अतिथि नहीं, बल्कि केंद्र और राज्यों की एक संयुक्त टीम मौजूद है, जो ग्रामीण भारत के विकास के लिए मिलकर कार्य करेगी।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऊँचाई ऐसी नहीं होनी चाहिए कि दूसरों को गले न लगाया जा सके। यही भावना शासन और विकास कार्यों में भी दिखाई देनी चाहिए।
गाँवों के विकास से ही बनेगा विकसित भारत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गाँव भारत की आत्मा, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र की सबसे मजबूत इकाई हैं। उन्होंने सम्मेलन को ग्रामीण समृद्धि का अमृत मंथन बताते हुए कहा कि यहाँ से निकलने वाले सुझाव आने वाले वर्षों में देश के प्रत्येक गाँव तक पहुँचेंगे।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल योजनाएँ बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि उनका लाभ बिना किसी भेदभाव, भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी के पात्र लोगों तक पहुँचे।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में होंगे सुधार
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में पूर्व में मशीनों के उपयोग, फर्जी उपस्थिति और वित्तीय अनियमितताओं जैसी समस्याएँ सामने आई थीं। इन्हें दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत श्रमिकों के कार्य दिवस 100 से बढ़ाकर 125 किए गए हैं तथा सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी जरूरतमंद श्रमिक काम से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि यदि पंचायतों तक उपलब्ध कराई जा रही बड़ी वित्तीय राशि का सही उपयोग हो तो ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
ग्रामीण विकास की सभी योजनाओं का होगा समन्वित क्रियान्वयन
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सम्मेलन में विकसित ग्राम अभियान, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण कौशल विकास तथा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को एक समन्वित ढाँचे में लागू करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पात्र परिवारों के भौतिक सत्यापन अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी पात्र गरीब को आवास से वंचित करना गंभीर अन्याय होगा। राज्यों से पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने की अपील भी की गई।
महिला सशक्तीकरण बनेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से करोड़ों ग्रामीण महिलाएँ आत्मनिर्भर बनी हैं और लाखों महिलाएँ लखपति दीदी बन चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को छह करोड़ तक पहुँचाना है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को अब केवल पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय, सेवा क्षेत्र तथा डिजिटल माध्यमों से जुड़े आधुनिक उद्यमों में भी आगे बढ़ाया जाएगा।
सड़क, सामाजिक सुरक्षा और आजीविका पर रहेगा विशेष ध्यान
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ और बाजार गाँवों तक पहुँचे हैं तथा किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने लगा है।
उन्होंने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत वृद्धावस्था, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन योजनाओं को और अधिक पारदर्शी तथा समयबद्ध बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
ग्रामीण भारत की बदलती तस्वीर
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में देशभर में लगभग आठ लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बनाई गई हैं। तीन करोड़ से अधिक पक्के आवास तैयार किए गए हैं। लगभग तीन करोड़ महिलाएँ लखपति दीदी बनी हैं तथा 10 करोड़ ग्रामीण महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि अब सरकार का अगला लक्ष्य निर्मित परिसंपत्तियों का बेहतर रखरखाव, योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पात्र लोगों तक पहुँचाना तथा ग्रामीण नागरिकों के जीवन को और अधिक सुगम बनाना है।
दूसरे दिन होगी मंत्रिस्तरीय चर्चा
सम्मेलन के दूसरे दिन सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करेंगे और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए साझा नीति एवं कार्ययोजना तैयार करेंगे। सम्मेलन में प्राप्त सुझावों के आधार पर ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आगे की रणनीति तय की जाएगी।
००

