0-11 वर्षों में शासन, भुगतान, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि तक डिजिटल पहुंच का अभूतपूर्व विस्तार
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम 1 जुलाई 2026 को अपने 11 वर्ष पूरे कर रहा है। वर्ष 2015 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी पहल ने भारत में नागरिकों के जुडऩे, सीखने, लेन-देन करने और सरकारी सेवाओं का लाभ लेने के तरीके में व्यापक बदलाव किया है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) तंत्रों में से एक विकसित कर चुका है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, कौशल विकास, बैंकिंग और कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक सुनिश्चित हुई है।
डिजिटल इंडिया ने सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, तेज, सरल और नागरिक-केंद्रित बनाया है। पहले जहां सरकारी सेवाओं के लिए लंबी कतारें, कागजी प्रक्रिया और कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। डिजिटल अवसंरचना में निवेश के कारण गांवों से लेकर शहरों तक इंटरनेट कनेक्टिविटी मजबूत हुई है और किफायती इंटरनेट ने डिजिटल तकनीक को आम नागरिक तक पहुंचाया है।
पिछले एक दशक में भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनकर उभरा है। एकीकृत भुगतान अंतरफलक (यूपीआई) के माध्यम से विश्व के लगभग 49 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल भुगतान हो रहे हैं। देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 12 से 14 प्रतिशत का योगदान दे रही है, जिसके अगले दशक में लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।
डिजिटल इंडिया के नौ प्रमुख स्तंभ
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम नौ प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, जिनका उद्देश्य डिजिटल पहुंच, सुशासन और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना है।
ब्रॉडबैंड राजमार्ग
भारतनेट परियोजना के तहत जनवरी 2026 तक लगभग 2.15 लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। लगभग सात लाख किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाई गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में ई-शासन, ऑनलाइन शिक्षा, टेली-चिकित्सा और डिजिटल भुगतान को गति मिली है।
सभी तक मोबाइल संपर्क
मार्च 2026 तक देश में ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 106.58 करोड़ हो गई है, जिससे अंतिम छोर तक डिजिटल संपर्क मजबूत हुआ है।
सार्वजनिक इंटरनेट पहुंच
देशभर में 6.5 लाख से अधिक सामान्य सेवा केंद्र तथा 1.6 लाख डाकघर डिजिटल सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। ये केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग, प्रमाण-पत्र, सरकारी योजनाओं और अन्य नागरिक सेवाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित कर रहे हैं।
ई-शासन
डिजिटल लॉकर तथा राष्ट्रीय एकल साइन-ऑन प्रणाली जैसे मंचों के माध्यम से प्रमाण-पत्र, आवेदन, भुगतान और सरकारी सेवाएं अब कागजरहित और सरल हो गई हैं।
ई-क्रांति
ई-अस्पताल, ई-संजीवनी और ई-न्यायालय जैसी सेवाओं ने स्वास्थ्य एवं न्याय व्यवस्था को डिजिटल बनाया है। ई-न्यायालय परियोजना के तहत 660 करोड़ से अधिक पृष्ठ डिजिटल रूप में परिवर्तित किए जा चुके हैं तथा 1.07 करोड़ मामलों की ऑनलाइन दाखिल प्रक्रिया पूरी हुई है।
सभी के लिए सूचना
माईगव और मुक्त सरकारी आंकड़ा मंच के माध्यम से नागरिकों को सरकारी योजनाओं एवं सूचनाओं तक वास्तविक समय में पहुंच मिल रही है।
इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण
वर्ष 2014-15 में जहां इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 1.9 लाख करोड़ रुपये था, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर लगभग 12 लाख करोड़ रुपये हो गया है। भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।
रोजगार के लिए सूचना प्रौद्योगिकी
सूचना प्रौद्योगिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवा उद्योग ने वर्ष 2025 में 283 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व अर्जित किया। देश में 2,100 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्रों में लगभग 26 लाख पेशेवर कार्यरत हैं।
त्वरित प्रभाव कार्यक्रम
बायोमेट्रिक उपस्थिति, सुरक्षित सरकारी ई-मेल, सार्वजनिक वाई-फाई, डिजिटल पुस्तकें और संदेश आधारित मौसम चेतावनी जैसी पहलों ने डिजिटल शासन को मजबूत किया।
जेएएम त्रयी बनी डिजिटल परिवर्तन की आधारशिला
जन-धन खाते, आधार और मोबाइल संपर्क ने वित्तीय समावेशन तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव किया है। फरवरी 2026 तक जन-धन खातों की संख्या बढ़कर 57.78 करोड़ हो गई, जबकि आधार नामांकन 144 करोड़ से अधिक पहुंच गया। जून 2026 तक 176 करोड़ लाभार्थियों को 51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके खातों में भेजी जा चुकी है।
आधार बना विश्व के लिए मॉडल
आधार ने सुरक्षित बायोमेट्रिक पहचान के माध्यम से बैंकिंग, सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं तक करोड़ों लोगों की पहुंच आसान बनाई। 30 अप्रैल 2025 तक 2,393 करोड़ से अधिक ई-केवाईसी (इलेक्ट्रॉनिक ग्राहक सत्यापन) लेन-देन दर्ज किए गए। आधार अनुप्रयोग के नवीन संस्करण को पांच माह में ही 3.1 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया गया।
डिजिटल लॉकर और यूपीआई की बढ़ती ताकत
मार्च 2026 तक डिजिटल लॉकर पर 70.69 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं तथा 850 करोड़ से अधिक डिजिटल दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं।
यूपीआई ने भारत में डिजिटल भुगतान को नई ऊंचाई दी है। वर्ष 2016-17 में केवल दो करोड़ लेन-देन से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ से अधिक लेन-देन दर्ज किए गए। यूपीआई अब नौ देशों तक पहुंच चुका है।
स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल बदलाव
ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली के माध्यम से 24 जून 2026 तक 1.37 करोड़ से अधिक ऑनलाइन चिकित्सकीय अपॉइंटमेंट दर्ज किए गए। ई-संजीवनी मंच के जरिए 48 करोड़ से अधिक टेली-परामर्श उपलब्ध कराए गए तथा 2.3 लाख से अधिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता इससे जुड़े हैं।
कोविड-19 महामारी के दौरान आरोग्य सेतु और कोविन मंच ने देश के टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कोविन के माध्यम से 220 करोड़ से अधिक टीकों का प्रबंधन किया गया।
टेली मानस सेवा मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए 40.42 लाख से अधिक कॉल संभाल चुकी है।
व्यापार और उद्योग को डिजिटल बल
सरकारी ई-बाजार (जीईएम) के माध्यम से जून 2026 तक 18.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद दर्ज की गई तथा 11 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सरकारी बाजार उपलब्ध हुआ।
डिजिटल वाणिज्य के लिए मुक्त नेटवर्क (ओएनडीसी) 20 करोड़ से अधिक खरीदारों, पांच लाख विक्रेताओं और एक हजार शहरों तक पहुंच चुका है। इससे छोटे व्यापारियों को व्यापक बाजार मिला है।
सामाजिक कल्याण योजनाओं की डिजिटल पहुंच
उमंग मंच पर जून 2026 तक 2,572 सरकारी सेवाएं उपलब्ध हैं तथा 796.69 करोड़ से अधिक लेन-देन दर्ज किए जा चुके हैं।
पोषण अनुगमन प्रणाली के माध्यम से 13.35 लाख आंगनवाड़ी केंद्र और 8.9 करोड़ से अधिक लाभार्थी जुड़े हैं।
प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत फरवरी 2026 तक 16.10 लाख करोड़ रुपये लागत वाली 352 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया।
युवा और किसान भी हुए डिजिटल रूप से सशक्त
मेरा युवा भारत मंच पर 2.21 करोड़ से अधिक युवाओं का पंजीकरण हो चुका है। इस मंच के माध्यम से स्वयंसेवा, प्रशिक्षण, कौशल विकास, रोजगार और नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
कृषि स्टैक के अंतर्गत मार्च 2026 तक 9.20 करोड़ से अधिक किसान पहचान-पत्र बनाए गए हैं। यह मंच किसानों को ऋण, बीमा, अनुदान, खरीद तथा व्यक्तिगत कृषि परामर्श उपलब्ध कराने में सहायक बन रहा है।
शिक्षा में डिजिटल क्रांति
डिजिटल अवसंरचना ज्ञान साझाकरण (दीक्षा) मंच पर मार्च 2026 तक दो करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हो चुके हैं। इसके माध्यम से क्यूआर कोड आधारित पाठ्यपुस्तकें, डिजिटल अध्ययन सामग्री तथा शिक्षक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।
स्वयं और स्वयं प्रभा मंच विद्यालय से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक नि:शुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध कराकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सभी तक पहुंचा रहे हैं।
विकसित भारत की मजबूत डिजिटल नींव
डिजिटल इंडिया अब केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल भविष्य की मजबूत आधारशिला बन चुका है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, डिजिटल भुगतान, ई-शासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और व्यापार के क्षेत्र में हुए व्यापक बदलावों ने भारत को तकनीक आधारित समावेशी विकास की दिशा में वैश्विक नेतृत्व प्रदान किया है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में डिजिटल इंडिया की भूमिका आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण होगी।
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