०सास, बहु के खिलाफ घरेलू हिंसा का प्रकरण दर्ज करायेगी
०आवेदिका से 6.30 लाख रूपये लेने वाले के खिलाफ एफ.आई.आर
कोण्डागांव, 02 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ0 किरणमयी नायक एवं प्रभारी सदस्य दीपिका शोरी, सह प्रभारी ओजस्वी मण्डावी ने जिला कोण्डागांव के सभा कक्ष में महिला उत्पीडऩ से संबंधित प्रस्तुत प्रकरणों पर जन सुनवाई की छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ0 किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर 407 एवं जिला में 7 वी जन सुनवाई हुई। प्रकरण संख्या 12 थे।
आज के सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में अनावेदक नगर सेना जगलदपुर में सहा.ग्रे. 03 के पद पर कार्यरत है। उनका कुल मासिक वेतन 36000/- रूपये प्रतिमाह है। आवेदिका का शारीरिक शोषण किया था जिससे एक बेटी का जन्म हुआ है। जिसका जन्म 15.01.2006 को हुआ था। वह अभी 12 वीं पास कर चुकी है। पहले आवेदक स्वयं को बच्ची का पिता होने से इंकार करता रहा था लेकिन उसका आधार कार्ड में अनावेदक का नाम पिता के नाम पर दर्ज है। उसका जाति प्रमाण पत्र भी अनावेदक बनवा चुका है। इससे स्पष्ट है कि अनावेदक यह भलीभांति जानता है कि आवेदिका एवं उसकी पुत्री का नाम अंकित है।पहले अनावेदक पिता होने से इंकार कर रहा था जब उससे आयोग द्वारा डी.एन.ए. टेस्ट कराये जाने पर उसने डी.एन.ए. टेस्ट से मना किया। क्योकि वह जानता है कि बेटी उसकी एवं आवेदिका की पुत्री है। अब तक अनावेदक ने बच्ची के पालन पोषण एवं शिक्षा-दीक्षा के लिए कोई रकम नही दिया है। उभय पक्ष को समझाईश दिये जाने पर आवेदिका एक मुश्त 200000/- दो लाख रूपये अपनी पुत्री के शिक्षा, पालन पोषण एवं विवाह को देने को तैयार है। चुंकि अनावेदक ने 200000/- दो लाख रूपया एक मुश्त भरण-पोषण देना स्वीकार किया है। तथा एक समय की मांग किया है। अत: इसे रायपुर सुनवाई 09.07.2026 की तिथि दिया जाता है। यदि वह 9 जुलाई 2026 को रायपुर सुनवाई में अनुपस्थित रहता है और आवेदिका को रूपये नहीं देता है ऐसी दशा में अनावेदक के कमाण्डेट नगर सेना बीजापुर को अनावेदक की सेवा समाप्ति की अनुशंसा भेजा जावेगा। प्रकरण आगामी सुनवाई दिनांक 09.07.2026 रायपुर।अन्य प्रकरण में आवेदिका को अनावेदकगण द्वारा समाज से बहिष्कृत किया गया है। जिस पर महिला आयोग ने विस्तृत सुनवाई हुई थी जिसमे सभी अनावेदकगण ने आयोग के समक्ष यह स्वीकार किया था कि आवेदका का सामाजिक बहिस्कार समाप्त कर दिया जावेगा लेकिन 2 वर्ष हो गए है। सामाजिक बहिष्कार समाप्त नही किया गया है। आज अनावेदक क्रं. 02 कहता है कि आवेदिका ने ग्राम समिति मे आवेदन नहीं किया इस लिए समाज मेे मिलाने की कार्यवाही नही की गई है। आवेदिका ने ग्राम समिति मे की गई आवेदन की प्रति आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया। जिसे देखने के बाद अनावेदक ने अपनी गलती स्वीकार किया है। अनावेदक का यह कृत्य इस बात की पुष्टि करता है कि अनावेदक आयोग के समक्ष किये गए माफीनामा से बचने का प्रयास कर रहा है। और आवेदिका का सामाजिक सम्मेलन अभी तक नहीं कराया है। इस हेतु सभी अनावेदकगणों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज कराया जा सकता है। इस पर अनावेदक क्र.02 का कथन है कि वह ग्राम समिति का लिखित आदेश आयोग में प्रस्तुत करेगा दिनांक 09.07.2026 को रायपुर कार्यालय में आवेदिका का सामाजिक बहिष्कार समाप्त कर दिया गया है। आगामी सुनवाई दिनांक 09.07.2026 रायपुर।अन्य प्रकरण में आवेदिका लगातार अनुपस्थित अनावेदक क्रं. 01 का नाम पूर्व में विलोपित। अनावेदक क्रं.02 उपस्थित। अनावेदक क्रं. 03 अनुपस्थित। चुंकि आवेदिका ने विभागीय कार्यवाहीयों से बचने के लिए यह प्रकरण प्रस्तुत किया है। तथा स्वयं कार्यवाही सुनवाई में उपस्थित नहीं हो रही है। अतएव परोक्त परिस्थितियों को देखते हुए प्रकरण नस्ती बद्ध किया जाता है।अन्य प्रकरण में उभय पक्ष अनुपस्थित। आवेदकगण द्वारा की गई शिकायत मे 20 लोगो के हस्ताक्षर है। इनमे से कोई भी उपस्थित नही है वरन् इन सभी कर्मचारियों ने कलेक्टर नारायणपुर के समक्ष लिखित कथन दिया है कि इनके द्वारा कोई शिकायत नहीं की गई है। अपर कलेक्टर नारायणपुर द्वारा प्रस्तुत जवाब एवं संलग्न दस्तावेजों के अवलोकन/परिशीलन उपरांत प्रकरण नस्ती बद्ध किया जाता है।अन्य प्रकरण में आवेदिका उपस्थित। अनावेदक अनुउपस्थित। आवेदिका की बेटी के साथ अनावेदक का संबंध था जिसके परीणामस्वरूप बेटी का जन्म हुआ है। जो 13 वर्ष की है। जो पोटाकेबिन देवगांव जिला नारायणपुर में पढ़ रही है। आवेदिका नानी है बेटी को उसके पास छोड़ दिया है। ऐसी दशा में बेटी के जाति एवं निवास प्रामाण पत्र आवेदन अनावेदक ग्राम साल्हेभाठ थाना – रावघाट जिला कांकेर का निवासी है। अत: अनावेदक के जाति कि आधार पर बेटी की जाति, निवास, आय प्रमाण पत्र बनाये जाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी/एस.डी.एम. नारायणपुर को अधिकृत किया जाता है। बेटी का जाति,निवास,आय, प्रमाण पत्र बनाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी एवं एस.डी.एम. कांकेर से बनाये जाने हेतु अनावेदक को पुलिस के माध्यम से उपस्थित कराकर बेटी का जाति, निवास, आय, प्रमाण पत्र बनाकर आवेदिका को उपलब्ध करावे। आज के आर्डर शीट की निशुल्क प्रति सखी नारायणपुर की केन्द्र प्रशासिका को दिया जाकर वह नारायणपुर जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क कर तथा सखी कांकेर से संपर्क कर आवेदिका के नातिन की जाति,आय,निवास प्रमाण पत्र बनाने हेतु समन्वय करें तथा इसकी सूचना माननीय सदस्य महिला आयोग को दी जावेगी। इस प्रकरण की निगरानी माननीय सदस्य महिला आयोग द्वारा की जावेगी।
अन्य प्रकरण में आवेदिका लगातार अनुपस्थित। अनावेदक प्लेसमेन्ट सर्विस की ओर से उपस्थित। उनके द्वारा आवेदिका को प्रस्ताव दिया जा चुका हैकि बीजापुर, जगदलपुर दोनो जगहो मे से किसी एक जगह पर कार्य पुन: प्रारंभ कर सकती है। आवेदिका ने कोई शुरूआत नही किया है। वह चाहे तो प्लेस्मेंट एजेंसी से संपर्क कर पुन: कार्य कर सकती है। प्रकरण नस्ती बद्ध किया जाता है।अन्य प्रकरण में अनावेदिकागण को लगातार सूचना की गई है। आवेदिका के आवेदन एवं चर्चा से यह स्पष्ट है कि विवाह के पूर्व अनावेदक क्रं.01 का पैर टूट गया था इसके बावजूद विवाह निर्धारित तिथि पर हुआ लेकिन विवाह के पश्चात से अनावेदकगण द्वारीा आवेदिका को घरेलू हिंसा एवं दैकिह प्रतारणा के मामले मे फसाने की धमकी दी जा रही है। और दुसरी तरफ अनावेदक क्रं. 01 आवेदिका के बेटे अपने पति से कहती है कि मां बाप को छोडकर रहेगा तब रहेगी। आवेदन की गंभीरता को देखते हुए आवेदिका को झूटे मामले में फसाने की संभावना स्पष्ट प्रतीत होती है। ऐसी दशा में आवेदिका को कोण्डागांव सखी प्रशासिका और संरक्षण अधिकारी से मिलकर अनावेदकगणों मे खिलाफ घरेलू हिंसा का प्रकरण दर्ज कराये जाने की अनुशंसा की जाती है। आज के ओदश पत्रिका की निशुल्क प्रमाणित प्रति संरक्षण अधिकारी (नवा बिहान) को दी जाती है। ताकि प्रकरण मे आगामी कार्यवाही आयोग की अनुशंसा के आधार पर की जा सके। प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।०००
अन्य प्ररकण में आवेदिका लगातार अनुपस्थित । अनावेदक क्रं. 01 उपस्थित। अनावेदक क्रं. 01 ने न्यायालय के आदेश के दस्तावेज प्रस्तुत किये धारा 07, एवं घरेलू हिंसा का मामला समाप्त हो चुका है। अवलोकन किया गया अनावेदक द्वारा अपने बालकों हेतु 7000/- एवं 7000/- कुल 14000/- रूपये भरण पोषण प्रदान किया जा रहा है। न्यायालय मे तलाक का मामला लंबित होना बताया गया। प्रकरण न्यायालय में लंबित है। अतएव प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।
अन्य प्ररकण में आवेदिका अनुपस्थित। आवेदिका को आज की सुनवाई की सूचना है व जानबूझकर अनुपस्थित है। अनावेदकगणों द्वारा थाना कोण्डागांव में केस वापस लेने की एवं पुलिस कार्यवाही मूलत: दिखाकर अभिलेख हेतु छायाप्रति प्रति पेश किया गया। दस्तावेज के आधार पर प्रकरण नस्तीद्ध किया जाता है।
अन्य प्रकरण में आवेदिका की शिकायत है कि अनावेदक असे अपनी दुकान बाजार में लगाने रोक लगाते है तथा गाली गलौच करते है। आवेदिका का बेटा विजय पेशे से वकील है। अनावेदक ने भी आवेदिका एवं उसके बेटे की लिखित शिकायते किया हुआ है। अन्य पक्ष के दस्तावेज एवं मोबाईल विडियों देखने के बाद यह स्पष्ट है उभय पक्षों की मध्य थाना/चौकी बांसकोट के द्वारा प्रतिबंधात्मक कार्यवाही किया जा चुका है। ऐसी दशा में प्रकरण का अवलोकन करने के उपरांत प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।
अन्य प्रकरण में आवेदिका और अनावेदक आपस मे मित्र थे। अनावेदक क्रं.02 ने अनावेदक 01 और 03 से मिलवाया और तीनो ने मिलकर आवेदिका से अलग-अलग समय पर आवेदिका से अपने अकाउंट पर फोन पे के माध्यम से 3.40 लाख रूपये फोन पे से व 80,000/- नगद ले लिया है। पैसे देने के एवं बातचीत का रिकार्ड आवेदिका के पास है। आवेदिका के प्रकरण को देखते हुए अनावेदकगणों के खिलाफ एफ.आई.आर. करने की समझाईश दी गई तथा उसकी मदद करने के लिए डी.एस.पी. को अधिकृत किया जाता है कि वह इस प्रकरण में आवेदिका की मदद करे और थाना कोतवाली कोण्डागांव में तत्काल प्रभाव से सभी अनावेदकगणों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही धोखाधड़ी एवं अन्य सुसंगत धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराएं। आज के आदेश पत्रिका की प्रमाणित प्रति कोण्डागांव डी.एस.पी. को निशुल्क प्रदान की जाती है ताकि आगे कानूनी कार्यवाही की जा सके। प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है। अनावेदनक क्रं. 01 उपस्थित असने आयोग के समक्ष अनुरोध किया है कि हवह समस्त ली गई राशि को चार चेक के माध्यम से वापस करने को तैयार है। इस प्रकरण को चुंकी डी.एस.पी. कोण्डागांव को दिया जा चुका है। अत: वह उभय पक्षों को बुलाकर दोनो पक्षों की मध्य एफ.आई.आर. एवं सुलह नामा कराने को स्वतंत्र है। प्रकरण नस्तीबद्ध।
अन्य प्रकरण में अनावेदक क्रमांक 01 कृषि विभाग कोण्डागांव मे भृत्य के पद पर पदस्थ है। आवेदिका पहली पत्नी एवं 02 बच्चों को छोड़कर अन्य विवाह कर लिया है। ऐसी दशा में सखी प्रशासक को जिम्मेदारी की जाती है कि वह आवेदिका का आवेदन कलेक्टर कोण्डागांव को प्रस्तुत करें तथा कलेक्टर महोदया से अनावेदक के दूसरे विवाह की जांच कराये एवं कृषि विभाग के अधिकारी से अनावेदक क्रं.01 के सेवा समाप्ति की अनुशंसा करें। अजा के आदेश पत्रिका की निशुल्क प्रति सखी प्रशासक को प्रदान की जावे ताकि प्रकरण में आवश्यक कार्यवाही तत्काल प्रभाव से प्रारंभ की जा सकें।
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