नई दिल्ली ,04 जुलाई ,। अगर आप कार या बाइक चलाते हैं, तो आपके पास पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (क्कष्ट) सर्टिफिकेट का होना बेहद जरूरी है। यह महत्वपूर्ण दस्तावेज इस बात का प्रमाण होता है कि आपका वाहन तय मानकों के तहत ही प्रदूषण फैला रहा है। बिना वैध पीयूसी के सड़क पर गाड़ी चलाना आपको कानूनी पचड़े में डाल सकता है और आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। ऐसे में हर वाहन मालिक के लिए यह जानना बेहद आवश्यक है कि पीयूसी खत्म होने के बाद नियम क्या कहते हैं और भविष्य में सरकार इसमें क्या बड़े बदलाव करने जा रही है।
कोई ग्रेस पीरियड नहीं, खत्म होते ही गैरकानूनी होगा वाहन चलाना
मोटर वाहन नियमों के मुताबिक, पीयूसी सर्टिफिकेट की वैधता समाप्त होने के बाद वाहन मालिक को कोई अतिरिक्त समय या ग्रेस पीरियड नहीं दिया जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि जिस दिन आपके सर्टिफिकेट की अवधि खत्म होती है, उसी दिन से सड़क पर बिना नया पीयूसी बनवाए गाड़ी चलाना पूरी तरह से नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इसलिए ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा हमेशा यह सलाह दी जाती है कि सर्टिफिकेट की अंतिम तारीख से पहले ही इसे रिन्यू करा लें, ताकि किसी भी तरह की परेशानी और चालान से बचा जा सके।
लग सकता है ?10,000 तक का भारी जुर्माना और लाइसेंस सस्पेंड
यदि कोई चालक बिना वैध पीयूसी सर्टिफिकेट के गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर कम से कम 1,000 रुपये और अधिकतम 10,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, अगर कोई व्यक्ति बार-बार इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे अतिरिक्त जुर्माना भरने के साथ-साथ सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। कुछ गंभीर मामलों में ट्रैफिक पुलिस चालान काटने के साथ ही चालक के ड्राइविंग लाइसेंस को तीन महीने तक के लिए निलंबित भी कर सकती है।
सरकार जल्द ला सकती है ‘क्कष्टष्ट 3.0Ó सिस्टम, नए वाहनों को मिलेगी राहत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार जल्द ही ‘क्कष्टष्ट 3.0Ó नाम से एक नई और आधुनिक व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है। इस नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य नए और कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के मालिकों को राहत देना है, जबकि ज्यादा धुआं छोडऩे वाले पुराने वाहनों की जांच को और अधिक सख्त बनाना है। अगर सरकार का यह नया प्रस्ताव लागू होता है, तो 1 अप्रैल 2020 के बाद खरीदे गए आधुनिक क्चस्-ङ्कढ्ढ निजी वाहनों के लिए पीयूसी सर्टिफिकेट की वैधता अवधि बढ़ाई जा सकती है। इससे नए गाड़ी मालिकों को बार-बार प्रदूषण जांच केंद्र के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी और उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।
पुराने और कमर्शियल वाहनों के लिए बढ़ जाएगी सख्ती
सरकार के नए प्रस्ताव के तहत पुराने वाहनों के लिए सख्ती बढ़ाई जा सकती है। इसके मुताबिक, मार्च 2020 से पहले बने क्चस्-ढ्ढङ्क वाहनों का पीयूसी अब हर 6 महीने में कराना अनिवार्य हो सकता है। वहीं, इससे भी पुराने यानी क्चस्-ढ्ढ, क्चस्-ढ्ढढ्ढ और क्चस्-ढ्ढढ्ढढ्ढ वाहनों के लिए यह जांच अवधि घटाकर हर 3 महीने की जा सकती है, ताकि सड़कों पर प्रदूषण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके। इसके अलावा कमर्शियल वाहनों के लिए भी नियमों में बदलाव की तैयारी है। प्रस्ताव के अनुसार, 6 साल तक पुराने क्चस्-ङ्कढ्ढ कमर्शियल वाहनों के लिए पीयूसी की वैधता 1 साल से बढ़ाकर 2 साल तक की जा सकती है, जिसके बाद वाहन की उम्र के हिसाब से उन पर नए नियम लागू होंगे।
वाहन मालिक क्या करें?
अगर आपके वाहन का पीयूसी सर्टिफिकेट जल्द ही समाप्त होने वाला है, तो अंतिम तारीख का इंतजार बिल्कुल न करें। समय रहते अपने नजदीकी प्रदूषण जांच केंद्र पर जाकर इसे रिन्यू कराना न सिर्फ आपको भारी जुर्माने और चालान से बचाएगा, बल्कि पर्यावरण को स्वच्छ रखने में भी आपकी एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका सुनिश्चित करेगा। समय पर पीयूसी बनवाना एक छोटी-सी आदत है, जो आपको किसी भी बड़ी परेशानी से बचा सकती है।
00
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

