बिलासपुर, 07 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गोवंश की जब्ती और उनकी अंतरिम कस्टडी से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर सुनवाई शुरू की है। अदालत यह तय करेगी कि गोवंश तस्करी या अवैध परिवहन के मामलों में एफआईआर दर्ज होने के बाद जब्त किए गए मवेशियों को ट्रायल कोर्ट अंतरिम सुपुर्दगी में देने का अधिकार रखता है या फिर छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 के विशेष प्रावधान इस अधिकार को सीमित कर देते हैं।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। इस जटिल कानूनी मुद्दे पर अदालत की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता नौशीना आफरीन अली को न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) नियुक्त किया गया है। साथ ही राज्य के महाधिवक्ता विवेक शर्मा को भी मामले में विशेष सहयोग देने के लिए अदालत में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।
दरअसल, हाईकोर्ट ने 18 मार्च 2021 को इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे लार्जर बेंच के समक्ष भेजा था। अदालत के सामने मूल प्रश्न यह है कि यदि पुलिस गोवंश से जुड़े किसी मामले में मवेशियों को जब्त करती है, तो क्या मजिस्ट्रेट कोर्ट को उन्हें अंतरिम रूप से किसी व्यक्ति को सुपुर्द करने का अधिकार है या विशेष कानून के प्रावधान इस अधिकार पर रोक लगाते हैं।
2 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मोहम्मद वासिम कुरैशी की ओर से अधिवक्ता ऋषिकांत महोबिया ने अदालत को बताया कि मूल आपराधिक मामले का ट्रायल पूरा हो चुका है और याचिकाकर्ता दोषमुक्त हो चुके हैं। इसलिए व्यक्तिगत रूप से उनकी याचिका में अब कोई विवाद शेष नहीं है।
हालांकि, डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि भले ही मूल आरोपी बरी हो चुका हो, लेकिन सिंगल जज द्वारा लार्जर बेंच को भेजे गए मूल कानूनी प्रश्न का समाधान आवश्यक है। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर स्पष्ट कानूनी व्याख्या भविष्य में राज्य के सभी समान मामलों के निपटारे के लिए महत्वपूर्ण होगी।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने अदालत को बताया कि मामला महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं से जुड़ा है और विस्तृत अध्ययन व तैयारी के लिए उन्हें कुछ समय चाहिए। अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 15 जुलाई निर्धारित की।
साथ ही हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि न्याय मित्र नौशीना आफरीन अली को याचिका, उससे जुड़े सभी दस्तावेज और अब तक पारित आदेशों की प्रतियां तत्काल उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वह अदालत की प्रभावी सहायता कर सकें।
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