रायपुर,07 जुलाईं (आरएनएस)। फर्जी अंकसूची के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में राज्य जीएसटी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। जीएसटी आयुक्त पुष्पेंद्र मीणा ने मंगलवार को किशोर पटेल और भागवत पटेल को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाने के आदेश जारी किए। दोनों पर वर्ष 2013 की भृत्य भर्ती में कक्षा आठवीं की फर्जी अंकसूची प्रस्तुत कर नौकरी हासिल करने का आरोप था।जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 की भर्ती प्रक्रिया में दोनों अभ्यर्थियों ने कक्षा आठवीं की अंकसूची में 96 प्रतिशत से अधिक अंक दर्शाए थे, जिसके आधार पर उनका चयन हुआ। बाद में दोनों की पदोन्नति होकर सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्ति हो गई।मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब किशोर पटेल कर्मचारी संघ का पदाधिकारी बना। बताया जाता है कि तत्कालीन विशेष आयुक्त टी.एल. ध्रुव के समन्वय कक्ष में पदस्थापना के दौरान टाइपिंग कार्य को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद किशोर पटेल ने कर्मचारी संघ और प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजी थी, जिसकी चर्चा मीडिया में भी हुई।समाचार प्रकाशित होने के बाद बलौदाबाजार के कुछ लोगों ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि किशोर पटेल और भागवत पटेल की कक्षा आठवीं की अंकसूचियां फर्जी हैं। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित मिडिल स्कूल के परीक्षा परिणाम रजिस्टर को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया। सूचना के अधिकार (क्रञ्जढ्ढ) से प्राप्त दस्तावेजों में यह भी सामने आया कि समतुल्यता परीक्षा में अनुपस्थित परीक्षार्थियों के रोल नंबर का उपयोग कर कथित रूप से फर्जी अंकसूचियां तैयार की गई थीं। आरोप यह भी है कि इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन प्रधान पाठक, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सारंगढ़ और जिला शिक्षा अधिकारी बलौदाबाजार की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा किया गया।शिकायत मिलने के बाद जीएसटी आयुक्त कार्यालय ने संबंधित शिक्षा अधिकारियों से अंकसूचियों का सत्यापन कराया था। प्रारंभिक जांच में इन्हें सही बताया गया, लेकिन बाद में विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना के दौरान मामला दोबारा उठा। इसके बाद विस्तृत जांच में आरोप सही पाए गए और अंतत: दोनों कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।हालांकि इस कार्रवाई के बाद भी कई सवाल बने हुए हैं। जिन शिक्षा अधिकारियों पर फर्जी दस्तावेजों का सत्यापन करने और कथित संरक्षण देने के आरोप लगे हैं, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, जानकारों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के मामलों में केवल विभागीय कार्रवाई ही नहीं, बल्कि आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का भी प्रावधान है। फिलहाल इस दिशा में किसी आपराधिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
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