० आत्मसमर्पित युवा बढ़ेंगे आत्मनिर्भरता की ओर
सुकमा, 10 जुलाईं (आरएनएस)। कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग सुकमा के संयुक्त तत्वावधान में 22 जून से 14 जुलाई 2026 के मध्य ‘मशरूम उत्पादनÓ पर दो दिवसीय विशेष प्रदर्शन-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन 15 दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम का हिस्सा था, जिसमें 25 आत्मसमर्पित प्रशिक्षणार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान विषय विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को मशरूम की वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक खेती के गुर सिखाए और मुख्यधारा में लौट रहे इन युवाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए प्रेरित किया।
इस व्यावहारिक प्रशिक्षण में विशेषज्ञों द्वारा ऑयस्टर मशरूम उत्पादन की संपूर्ण तकनीक का सजीव प्रदर्शन किया गया। प्रशिक्षणार्थियों को धान के पुआल के उपचार, नमी संतुलन, स्पॉन (बीज) रोपण, पॉलीबैग प्रबंधन से लेकर फसल की तुड़ाई, पैकेजिंग और स्थानीय बाजार में विपणन (मार्केटिंग) की रणनीतियों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि मशरूम उत्पादन बेहद कम स्थान, न्यूनतम लागत और अल्प समय में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है, जिसे ग्रामीण व वनांचल क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों से आसानी से शुरू कर नियमित आय अर्जित की जा सकती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ‘सुपर फूडÓ माने जाने वाले मशरूम में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन-डी और आवश्यक खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। कम वसा और कम कैलोरी वाले इस पौष्टिक आहार की बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए इसे स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम माना जा रहा है। इस अभिनव प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आत्मसमर्पित नागरिकों को कृषि आधारित आजीविका से जोड़कर समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जीने के अवसर प्रदान करना है।
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