कोरबा 11 जुलाई (आरएनएस)। बारिश का मौसम खुली व भूमिगत कोयला खदानों के लिए हर वर्ष बड़ी चुनौती लेकर आता है। लगातार होने वाली भारी वर्षा के कारण जलभराव, ओवरबर्डन खिसकने, मशीनों के क्षतिग्रस्त होने और कर्मचारियों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ जाता है। इन्हीं संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने अपने सभी खनन क्षेत्रों में व्यापक सुरक्षा एवं बचाव की तैयारियां पहले से पूरी कर ली हैं।
पिछले वर्ष कुसमुंडा परियोजना में भारी बारिश के दौरान एक इंजीनियर के मलबे में बह जाने से हुई दर्दनाक मौत के बाद प्रबंधन ने सुरक्षा मानकों को और अधिक सख्त किया है। इस बार वर्षाकाल के दौरान किसी भी प्रकार की अनहोनी रोकने के लिए सभी परियोजनाओं में विशेष निगरानी रखी जा रही है। कोल इंडिया की सर्वाधिक लाभ अर्जित करने वाली कंपनियों में शामिल एसईसीएल की सबसे बड़ी परियोजनाएं कोरबा जिले में संचालित हैं। इनमें गेवरा परियोजना का नाम देश की मेगा कोयला खदानों में शामिल है। गेवरा क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक संजीव मिश्रा ने बताया कि मानसून को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी कर ली गई हैं। खदानों में जलभराव रोकने, ढलानों की निगरानी, ड्रेनेज व्यवस्था मजबूत करने तथा भारी बारिश के दौरान पानी की निकासी के लिए उच्च क्षमता वाले मोटर पंप लगाए गए हैं।
इसी प्रकार दीपिका, कुसमुंडा और कोरबा क्षेत्र की खदानों में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। संबंधित परियोजनाओं के मुख्य महाप्रबंधकों ने मानसून शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधार कार्य पूरे कराए हैं। उद्देश्य यह है कि कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रतिकूल मौसम के बावजूद कोयला उत्पादन और परिवहन बाधित न हो।
पिछले वर्ष बारिश से हुआ था भारी नुकसान
वर्ष 2025 के मानसून में कोरबा जिले में रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई थी, जिसका असर सामान्य जनजीवन के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ा था। एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में शामिल गेवरा परियोजना में ओवरबर्डन क्षेत्र से भारी मात्रा में मलबा खिसककर खदान में पहुंच गया था। इसके कारण कई भारी मशीनें और वाहन मलबे में दब गए, जिससे उनका संचालन लंबे समय तक प्रभावित रहा। उत्पादन पर इसका सीधा असर पड़ा और कंपनी को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। इन अनुभवों से सबक लेते हुए एसईसीएल प्रबंधन ने इस वर्ष मानसून के दौरान सुरक्षा, जल निकासी और आपदा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, ताकि कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ-साथ कोयला उत्पादन भी निर्बाध रूप से जारी रखा जा सके।
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