गरियाबंद, 11 जुलाईं (आरएनएस)। जिले में आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से कराए गए करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य और प्रशासनिक फैसले अब सवालों के घेरे में हैं। स्कूल जतन योजना के तहत कई निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं, स्कूलों में शौचालय निर्माण समय पर पूरा नहीं हो सका और स्वीकृत पदों से अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति के कारण करोड़ों रुपये के वेतन का भुगतान लंबित है। जिला प्रशासन ने पूरे मामले में जांच, राशि वसूली और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, स्कूल जतन योजना के तहत 830 स्कूलों के निर्माण और मरम्मत कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) को सौंपे गए थे, जिनमें अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं। वहीं आदिवासी विकास विभाग को दिए गए 165 कार्यों में 50 से अधिक अब भी अधूरे हैं। इनमें 24 कार्य ऐसे हैं जिनके लिए ठेकेदारों को अग्रिम भुगतान किया गया, लेकिन निर्माण पूरा नहीं हुआ। इन मामलों में करीब 2.88 करोड़ रुपये की वसूली के लिए संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी किए गए हैं और भुगतान नहीं होने पर एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी गई है।

स्कूलों में शौचालय निर्माण को लेकर भी गंभीर लापरवाही सामने आई है। जिले के 116 स्कूलों में शौचालय निर्माण के लिए करीब एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण एजेंसी को 61 लाख रुपये अग्रिम भुगतान किए जाने के बावजूद करीब दस महीने में केवल 23 शौचालय ही बन सके। शेष राशि में से 36 लाख रुपये की वसूली के लिए भी प्रशासन ने नोटिस जारी किया है।
वहीं आदिवासी विकास विभाग की 79 आश्रम-शालाओं में स्वीकृत 255 पदों के मुकाबले 513 कर्मचारियों की नियुक्ति किए जाने का मामला भी चर्चा में है। अतिरिक्त नियुक्तियों के कारण शासन से पर्याप्त बजट नहीं मिलने पर कर्मचारियों का वेतन लंबित हो गया। मार्च 2026 में लंबित वेतन के भुगतान के लिए 3.84 करोड़ रुपये की मांग शासन को भेजी गई है। प्रभावित कर्मचारी कई बार आंदोलन भी कर चुके हैं।

कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने स्वीकार किया कि कई कार्य अधूरे हैं और उनका भौतिक सत्यापन कराया जा चुका है। उन्होंने बताया कि संबंधित ठेकेदारों को राशि जमा करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं तथा आवश्यकता पडऩे पर दूसरे जिलों में आरआरसी प्रकरण दर्ज कर संपत्ति कुर्क कर वसूली की जाएगी। कलेक्टर ने यह भी कहा कि कुछ अनियमितताएं उनके कार्यकाल से पहले की हैं और कुछ उनके कार्यकाल के दौरान हुईं। उनके अनुसार तत्कालीन सहायक आयुक्त नवीन भगत के कार्यकाल में हुई गड़बडिय़ों की जांच कर शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि अब प्राथमिकता सभी अनियमितताओं को दूर कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
बंछोर
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