रायपुर,11 जुलाईं (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में बड़ी पहल करने जा रही है। उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर के उन गांवों की पहचान कर उनका जैविक प्रमाणन कराने के निर्देश दिए हैं, जहां आज तक खेती में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं हुआ है। सरकार का लक्ष्य बस्तर के जैविक उत्पादों को यूरोप सहित वैश्विक बाजार तक पहुंचाकर किसानों की आय में कई गुना वृद्धि करना है।
नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हालिया बस्तर प्रवास के दौरान नारायणपुर और कांकेर के नक्सल मुक्त गांवों के किसानों ने बताया कि उन्होंने कभी रासायनिक खाद का उपयोग नहीं किया। ऐसे गांवों को राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) से जोड़कर उनका प्रमाणन कराया जाएगा।
किसानों को मिलेगा तीन से चार गुना अधिक दाम
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक प्रमाणन मिलने के बाद किसानों को अपने उत्पादों का मौजूदा कीमत से तीन से चार गुना अधिक मूल्य मिल सकेगा। इससे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और बस्तर की कृषि को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
यूरोप तक पहुंचेंगे बस्तर के उत्पाद
बैठक में एपीडा, कृषि विभाग और पंचायत विभाग के अधिकारियों के साथ जैविक उत्पादों के प्रमाणन और निर्यात की रणनीति पर चर्चा हुई। सरकार राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) और सहभागी गारंटी प्रणाली (पीजीएस) के तहत प्रमाणन प्रक्रिया पूरी कर बस्तर के उत्पादों को यूरोपीय बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है।
संयुक्त दल करेगा सर्वे और परीक्षण
सरकार ने नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिलों में सर्वेक्षण के लिए संयुक्त दल गठित करने के निर्देश दिए हैं। ये दल एपीडा और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ जैविक क्षेत्रों का परीक्षण करेंगे और ग्राम पंचायतों को जैविक प्रमाणन दिलाने की प्रक्रिया पूरी करेंगे। प्रमाणित उत्पादों का निर्यात बिहान के ‘छत्तीसकलाÓ ब्रांड के माध्यम से किया जाएगा।
प्रमाणन नियमों में छूट की मांग
उप मुख्यमंत्री ने बस्तर की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए जैविक प्रमाणन के लिए आवश्यक तीन वर्ष की अवधि में छूट देने संबंधी प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने के निर्देश भी दिए। साथ ही वनोपज को निर्यात योग्य बनाने की तैयारी करने पर भी जोर दिया, ताकि वन उत्पादों का बेहतर मूल्य स्थानीय लोगों को मिल सके।बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, कृषि विभाग, एपीडा और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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