नई दिल्ली/धार,14 जुलाई(आरएनएस)। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा धार की भोजशाला को मंदिर घोषित करने के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की 3 याचिकाओं पर एक साथ मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्षों की अपील पर सुनवाई करने पर सहमति जताई. कोर्ट ने शुक्रवार को परिसर में नमाज पढऩे की मुस्लिम पक्षों की मांग को मंजूरी नहीं दी. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी.मोहना की बेंच ने की.
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ़ मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर 3 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (एएसआई) से जवाब मांगा है. बेंच ने कहा शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज पढऩे के लिए अपील करने वालों और मुस्लिम समुदाय के अन्य सदस्यों को संबंधित परिसर से सटी एक अलग खुली जगह दी जा सकती है. कोर्ट ने साफ किया यह व्यवस्था अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगी और यह अस्थायी होगी. इससे दोनों पक्षों के दावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया एएसआई कोई ढांचागत बदलाव न करे. मुस्लिम पक्ष के वकील ने तर्क दिया 2003 से चली आ रही पुरानी व्यवस्था, जिसके तहत तय दिनों पर उस जगह पर हिंदू और मुस्लिम पूजा कर सकते थे, को इस दौरान जारी रहने दिया जाना चाहिए. उनके मुवक्किलों को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है. कोर्ट ने कहा ये बहुत संवेदनशील मामला है. कोर्ट में कही गई बातों से बेवजह विवाद पैदा हो सकते हैं या ग़लत संदेश जा सकता है. हमें इस्तेमाल की जाने वाली हर बात को लेकर बहुत सावधान रहना होगा.
कोर्ट ने गौर किया यह पहली बार था जब अंतरिम व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा उसके सामने आया. कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा, हमारी राय है कि अभी जो भी व्यवस्था लागू है, उसके साथ ही मामले को 10 से 15 दिन के भीतर किसी उपयुक्त बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जा सकता है. उसे ऐसा कोई आदेश नहीं देना चाहिए, जिससे तनाव पैदा हो. मुस्लिम पक्ष की ओर से सीनियर एडवोकेट हुज़ेफ़ा अहमदी ने दलील दी मुख्य मुद्दा यह था कि क्या तथ्यों से जुड़े विवादों को रिट याचिका के ज़रिए सुलझाया जा सकता था. लगभग 800 साल से चली आ रही यथास्थिति को बिगाड़ा गया है.
मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा हाई कोर्ट के फ़ैसले के बाद के दो महीनों में कई घटनाक्रम हुए हैं. उन्होंने पुरानी यथास्थिति बहाल करने पर चिंता जताई. अगर आप दो महीने बाद आकर पुरानी यथास्थिति बहाल करने की मांग करते हैं, तो प्रशासनिक दिक्कतें पैदा होंगी. मुस्लिम याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा वहां 12वीं सदी से एक मस्जिद मौजूद है और कम से कम 800 सालों से वहां नमाज़ पढ़ी जा रही है, तो इसे क्यों छेड़ा जाए?
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