० अजय चंद्राकर बोले- 26 साल बाद भी नहीं बना अभिलेखागार, संस्कृति मंत्री ने कहा- संरक्षण और डिजिटलीकरण का काम जारी
रायपुर, 14 जुलाईं (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रदेश की सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर और धर्मजीत सिंह ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से सरकार से जवाब मांगा और राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
अजय चंद्राकर ने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी छत्तीसगढ़ का समग्र इतिहास सुरक्षित रखने के लिए कोई व्यवस्थित अभिलेखागार तैयार नहीं हो पाया है। उन्होंने सिरपुर, भोरमदेव, राजिम, बारसूर सहित कई ऐतिहासिक स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां से प्राप्त प्राचीन मूर्तियों और अवशेषों का समुचित दस्तावेजीकरण नहीं किया गया है।
उन्होंने महंत घासीदास संग्रहालय से 1980 के दशक में चोरी हुई 7वीं शताब्दी की भगवान अवलोकितेश्वर की करीब 19 करोड़ रुपये मूल्य की दुर्लभ प्रतिमा का मामला भी उठाया। चंद्राकर ने कहा कि यह प्रतिमा अमेरिका में बरामद होने के बावजूद राज्य के पास उसके मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं, क्योंकि संग्रहालय का रजिस्टर दीमक से नष्ट हो गया। इससे प्रतिमा की वापसी की प्रक्रिया प्रभावित हुई और विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
भाजपा विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश की कई पुरातात्विक साइटें उपेक्षा का शिकार हैं, केवल एक स्थान पर खुदाई का कार्य चल रहा है। उन्होंने पुरखौती मुक्तांगन की भूमि अन्य कार्यों के लिए आवंटित किए जाने और संस्कृति, इतिहास तथा पुरातत्व पर पर्याप्त शोध नहीं होने का भी मुद्दा उठाया।
विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि ताला, मल्हार, बिलासपुर और भोरमदेव जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर भी आधुनिक संग्रहालयों का अभाव है। वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरगुजा के रामगढ़ स्थित प्राचीन नाट्यशाला के संरक्षण पर चिंता जताई।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि राज्य की प्राचीन धरोहरों का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सहयोग से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नए संग्रहालयों के निर्माण का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है तथा भोरमदेव मंदिर के संरक्षण एवं विकास के लिए केंद्र से 150 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं।
मंत्री ने महंत घासीदास संग्रहालय के रजिस्टर नष्ट होने के मामले में संबंधित जिम्मेदार अधिकारी को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी दी। साथ ही बताया कि प्रदेश में अभिलेखागार विकसित करने और मध्यप्रदेश से प्राप्त लाखों ऐतिहासिक दस्तावेजों के डिजिटलीकरण का कार्य जारी है, जिससे भविष्य में छत्तीसगढ़ के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी एक स्थान पर उपलब्ध कराई जा सकेगी।
त्रिपाठी
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