0-नीट, सीबीएसई, परिसीमन, पंजाब कांग्रेस विवाद और मानसून सत्र के मुद्दों पर हुई विस्तृत चर्चा
नई दिल्ली,14 जुलाई(आरएनएस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी विदेश यात्रा से लौटने के बाद मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े से मिले। दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई बैठक में पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) एवं केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) परीक्षाओं से जुड़े छात्र आंदोलन, संसद के आगामी मानसून सत्र की रणनीति तथा संभावित परिसीमन विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण राजनीतिक विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक विवाद पर विचार किया गया। हालांकि इसे सुलझाने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हाल ही में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के दौरे के दौरान यह विवाद खुलकर सामने आया था। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा के समर्थक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग को पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पार्टी नेतृत्व ने हाल ही में वडि़ंग को उनके पद पर बनाए रखने का निर्णय लिया था।
बैठक में दूसरा प्रमुख विषय नीट प्रश्नपत्र लीक और सीबीएसई परीक्षाओं में कथित अव्यवस्था के विरोध में कांग्रेस के छात्र अभियान को आगे बढ़ाने का रहा। राहुल गांधी ने इस अभियान की शुरुआत 17 जून को राजस्थान के कोटा से की थी। अभियान का अगला कार्यक्रम पहले 15 जुलाई को पटना में प्रस्तावित था, लेकिन अब इसे 17 जुलाई को देहरादून में आयोजित किया जाएगा।
कांग्रेस के सूत्रों का आरोप है कि उत्तराखंड सरकार राजनीतिक कारणों से छात्र रैली के लिए कार्यक्रम स्थल की अनुमति देने में देरी कर रही है, जिससे आयोजन में बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं।
बैठक में राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े और राहुल गांधी ने 20 जुलाई से 13 अगस्त तक प्रस्तावित संसद के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया।
कांग्रेस का कहना है कि अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा गबन का मामला मानसून सत्र का प्रमुख मुद्दा होगा। पार्टी इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग कर रही है। कांग्रेस का दावा है कि इस मामले ने सरकार को असहज स्थिति में ला दिया है।
लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक मोहम्मद जावेद ने कहा कि सरकार को इस मामले सहित कई विषयों पर जवाब देना होगा। उन्होंने बताया कि कांग्रेस मानसून सत्र में नीट, सीबीएसई, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), विदेशी चंदा, विदेश नीति तथा अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उठाएगी।
बैठक में संभावित परिसीमन विधेयक पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने की तैयारी कर रही है। विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडियाÓ ने पूर्व में इस प्रस्ताव का विरोध किया था और अब भी इसे लेकर रणनीति बना रहा है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार दो-तिहाई बहुमत सुनिश्चित करने के लिए तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) जैसे दलों में विभाजन कराने का प्रयास कर रही है, ताकि परिसीमन विधेयक पारित कराया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, यदि परिसीमन विधेयक संसद में लाया जाता है तो तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह बागी सांसद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसके लोकसभा में 22 सांसद हैं।
हालांकि द्रमुक ने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग करते हुए संकेत दिया है कि वह अब कांग्रेस के साथ पूर्व जैसी राजनीतिक स्थिति में नहीं है। बताया जा रहा है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस द्वारा तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की सरकार बनने के समर्थन को लेकर द्रमुक नाराज है।
मोहम्मद जावेद ने कहा कि द्रमुक एक अनुभवी और राष्ट्रीय मुद्दों को समझने वाली पार्टी है। उनका विश्वास है कि यदि परिसीमन विधेयक लागू हुआ तो तमिलनाडु को नुकसान होगा और द्रमुक इस विषय पर पहले की तरह अपना विरोध जारी रखेगी।
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