डिंडौरी 14 जुलाई (आरएनएस)। जिले की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इस बार विवाद के केंद्र में शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक ओमप्रकाश धुर्वे हैं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) के जिला अध्यक्ष रामप्रसाद तेकाम ने कलेक्टर डिंडौरी को शिकायत सौंपकर विधायक पर पंचायतों के कामकाज में हस्तक्षेप और पंचायत निधि के कथित दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं जीजीपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमान सिंह पोर्ते ने भी विधायक के खिलाफ तीखा हमला बोलते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए अमान सिंह पोर्ते पर मिशनरी के लिए काम करने का आरोप लगाया है। इससे जिले का सियासी माहौल पूरी तरह गर्मा गया है।
जीजीपी जिला अध्यक्ष रामप्रसाद तेकाम द्वारा कलेक्टर को दिए गए शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि शाहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ग्राम पंचायतों के सरपंच और सचिवों पर दबाव बनाते हैं। शिकायत के अनुसार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से मिलने वाली पंचायत निधि का उपयोग केवल पंचायत के विकास कार्यों के लिए होना चाहिए और उसके संचालन का अधिकार पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों के पास होता है। लेकिन आरोप है कि विधायक अपने राजनीतिक कार्यक्रमों और निजी आयोजनों में पंचायत संसाधनों का उपयोग कराते हैं।
शिकायत में कहा गया है कि विधायक के कार्यक्रमों में टेंट, मंच, स्वागत, फूल-माला, शॉल तथा अन्य व्यवस्थाओं का खर्च पंचायत निधि से कराया जाता है। इतना ही नहीं, पंचायतों की गाडिय़ों का उपयोग भी विधायक के कार्यक्रमों में लोगों को लाने-ले जाने के लिए किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की गाइडलाइन में इस प्रकार के खर्च का कोई प्रावधान नहीं है और यदि ऐसा किया जा रहा है तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
शिकायत में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा भूमि पूजन को लेकर उठाया गया है। जीजीपी का कहना है कि ग्राम पंचायत के विकास कार्यों का भूमि पूजन पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों, विशेष रूप से सरपंच एवं संबंधित वार्ड पंचों द्वारा किया जाना चाहिए। लेकिन आरोप है कि शाहपुरा विधायक पंचायतों के छोटे-छोटे निर्माण कार्यों का भी स्वयं भूमि पूजन करते हैं और पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करते हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे पंचायत राज व्यवस्था की भावना प्रभावित होती है।
जीजीपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमान सिंह पोर्ते ने भी विधायक पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यदि पंचायतों में कथित भ्रष्टाचार और हस्तक्षेप बंद नहीं हुआ तो उनकी पार्टी गांव-गांव जाकर पोस्टरों और जनसंपर्क अभियान के माध्यम से पूरे मामले को जनता के सामने रखेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायतों में राजनीतिक दबाव बनाकर सरकारी संसाधनों का गलत उपयोग कराया जा रहा है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि इन आरोपों पर शाहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। विधायक ने जीजीपी के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अमान सिंह पोर्ते मिशनरी के लिए कार्य कर रहे हैं और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। विधायक का कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और उनका वास्तविक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम ने डिंडौरी जिले की राजनीति को नई बहस दे दी है। एक ओर विपक्षी दल पंचायतों में कथित हस्तक्षेप और सरकारी निधि के दुरुपयोग का मुद्दा उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर विधायक इसे राजनीतिक षड्यंत्र और उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश बता रहे हैं। ऐसे में यह विवाद केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पंचायत व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं तो यह पंचायत राज व्यवस्था से जुड़े गंभीर विषय हैं और इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो संबंधित पक्षों को भी तथ्यात्मक दस्तावेजों के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। लोकतंत्र में आरोप लगाना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी उन आरोपों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करना भी है।
अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। कलेक्टर के समक्ष शिकायत पहुंच चुकी है। यदि प्रशासन इस मामले में जांच के आदेश देता है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि पंचायत निधि का उपयोग नियमानुसार हुआ या नहीं, पंचायत संसाधनों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और क्या पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में किसी प्रकार का अनुचित हस्तक्षेप हुआ।
फिलहाल इतना तय है कि शाहपुरा विधानसभा की यह राजनीतिक लड़ाई अब सार्वजनिक मंच पर आ चुकी है। आने वाले दिनों में यदि जांच होती है तो उसके निष्कर्ष ही तय करेंगे कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। तब तक यह मामला डिंडौरी की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना रहेगा। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन इन आरोपों की पुष्टि किसी सक्षम जांच एजेंसी या प्रशासनिक जांच से होना अभी बाकी है।
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