0-52 सप्ताह में 52 सुधारों का लक्ष्य, बंद कंटेनरों से होगी फ्लाई ऐश की ढुलाई, माल परिवहन होगा अधिक सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल
नई दिल्ली,14 जुलाई(आरएनएस)। केंद्र सरकार ने भारतीय रेल को अधिक आधुनिक, दक्ष और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को सुधार एक्सप्रेस पहल के तहत रेलवे में आठ नए संरचनात्मक सुधारों की घोषणा की। इसके साथ ही इस अभियान के अंतर्गत लागू किए गए सुधारों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। रेल मंत्री ने कहा कि मंत्रालय का लक्ष्य 52 सप्ताह में 52 सुधार लागू करना है, ताकि रेलवे की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, दक्षता और नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
रेल मंत्री ने बताया कि देश में प्रतिवर्ष लगभग 34 करोड़ टन फ्लाई ऐश का उत्पादन होता है। अब तक इसकी ढुलाई खुले माल वैगनों में होने से धूल प्रदूषण की समस्या बनी रहती थी। नई व्यवस्था के तहत अब अंतरराष्ट्रीय मानक (आईएसओ) के बंद कंटेनरों में फ्लाई ऐश का परिवहन किया जाएगा। इससे बिजली संयंत्रों से सीधे लोडिंग, सुरक्षित उताराई, सीमेंट संयंत्रों में बेहतर भंडारण तथा प्रदूषण-मुक्त परिवहन सुनिश्चित होगा। साथ ही सड़क परिवहन पर निर्भरता भी कम होगी।
कंटेनर रेलगाड़ी परिचालक लाइसेंस व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले चार अलग-अलग श्रेणियों के लाइसेंस होते थे, जिन्हें समाप्त कर अब पूरे देश के लिए एक समान लाइसेंस व्यवस्था लागू की गई है। अब 25 करोड़ रुपये के एकमुश्त शुल्क पर कोई भी परिचालक पूरे भारतीय रेल नेटवर्क पर कंटेनर रेलगाडिय़ां संचालित कर सकेगा। यह लाइसेंस 20 वर्ष तक मान्य रहेगा तथा इसके नवीनीकरण के लिए अलग से कोई शुल्क नहीं देना होगा। इससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ व्यापार करना भी आसान होगा।
रेल मंत्रालय ने उर्वरक परिवहन की मालभाड़ा दरों को भी सरल बना दिया है। पहले 50 अलग-अलग दर श्रेणियां थीं, जिन्हें घटाकर अब प्रति टन प्रति किलोमीटर के केवल तीन स्तर कर दिया गया है। अब उर्वरकों का परिवहन कंटेनरों में भी किया जा सकेगा। इससे पूरी मालगाड़ी खाली होने की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी और आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर माल उतारा जा सकेगा। इससे वैगनों की उपलब्धता बढ़ेगी और वर्षा के दौरान होने वाले नुकसान में भी कमी आएगी।
रेल परियोजनाओं में कार्यरत वेल्डिंग, फिटर, राजमिस्त्री तथा अन्य कुशल कारीगरों की पहचान, मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए भी नई नीति लागू की गई है। सफल कारीगरों को त्वरित पहचान (क्यूआर) कोड युक्त कौशल प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इसकी शुरुआत बड़े पुलों और सुरंग परियोजनाओं से होगी तथा अगले 24 महीनों में इसे सभी रेलवे मंडलों और क्षेत्रों में लागू किया जाएगा।
ठेकेदारी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए अब ठेकेदारों से अनुबंध के प्रारंभ में ही 10 प्रतिशत कार्य निष्पादन सुरक्षा राशि ली जाएगी। जिन कंपनियों पर उनकी कुल संपत्ति के 50 प्रतिशत से अधिक मूल्य के न्यायालयीन विवाद लंबित होंगे, उन्हें निविदा प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति नहीं मिलेगी। इसके साथ ही सभी ठेकेदारों के लिए समग्र ठेका जोखिम बीमा तथा व्यावसायिक दायित्व बीमा अनिवार्य किया गया है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (क्रिस) द्वारा विकसित रेल भूमि पोर्टल भी प्रारंभ किया गया है, जिससे भूमि संबंधी कार्यों में तेजी आएगी।
नई नीति के तहत अब उद्योग एवं निर्माता अपनी आवश्यकता के अनुरूप विशेष माल वैगनों के डिज़ाइन स्वयं प्रस्तुत कर सकेंगे। रेलवे अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की स्वीकृति, प्रारूप परीक्षण तथा संबंधित तकनीकी जांच के बाद ऐसे वैगनों को सेवा में शामिल किया जाएगा। इससे इस्पात, पेट्रोलियम, रसायन, दुग्ध तथा अन्य उद्योगों के लिए विशेष रूप से तैयार वैगनों का उपयोग संभव होगा।
तेल परिवहन के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब तक केवल रेलवे के टैंक वैगनों का उपयोग किया जाता था, जबकि नई व्यवस्था के अनुसार तेल कंपनियां स्वयं या पट्टे पर विशेष टैंक वैगन खरीदकर उनका संचालन कर सकेंगी। इससे परिवहन लागत घटेगी तथा सड़क परिवहन के दौरान होने वाले नुकसान और मिलावट की आशंका भी कम होगी।
खाद्यान्न परिवहन के लिए भी जटिल मालभाड़ा व्यवस्था समाप्त कर प्रति टन प्रति किलोमीटर की सरल दर लागू की गई है। अब खाद्यान्न की ढुलाई भी कंटेनरों के माध्यम से की जा सकेगी, जिससे सीलबंद परिवहन, सुरक्षित भंडारण और आवश्यकता के अनुसार चरणबद्ध वितरण संभव होगा।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इन सभी सुधारों का उद्देश्य अधिक से अधिक माल परिवहन को सड़क से रेल की ओर स्थानांतरित करना है। उन्होंने बताया कि रेल परिवहन सड़क की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन करता है। इससे न केवल परिवहन लागत घटेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।
रेल मंत्री ने बताया कि सुधार एक्सप्रेस अभियान के पहले चरण में ऑन-बोर्ड सफाई व्यवस्था, गति शक्ति माल टर्मिनल, रेलटेक पोर्टल तथा टिकट धनवापसी नियमों सहित नौ महत्वपूर्ण सुधार पहले ही लागू किए जा चुके हैं। अब नए आठ सुधारों के साथ रेलवे को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया है।
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