भुवनेश्वर 20 Jully (Rns) : 1109 करोड़ रुपये के कथित बैंक ऋण घोटाले की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ा कदम उठाते हुए गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की है। भुवनेश्वर की विशेष सीबीआई अदालत से मिले तलाशी वारंट के आधार पर ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और झारखंड में कार्रवाई की गई। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
सीबीआई के अनुसार, कंपनी पर बैंकों से अधिक ऋण प्राप्त करने के लिए वित्तीय आंकड़ों और स्टॉक वैल्यू को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप है। जांच एजेंसी का कहना है कि कथित तौर पर गलत वित्तीय जानकारी के आधार पर ऋण सीमा बढ़वाई गई और बाद में ऋण राशि का दुरुपयोग करते हुए उसे अन्य खातों एवं उद्देश्यों में स्थानांतरित किया गया, जिससे बैंकों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
छापेमारी के दौरान भुवनेश्वर में कंपनी के चार निदेशकों के आवास, कोलकाता स्थित पंजीकृत कार्यालय, उत्तराखंड के काशीपुर, तमिलनाडु के तिरुवल्लूर तथा भुवनेश्वर स्थित उत्पादन इकाइयों की तलाशी ली गई। सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच जारी है और जब्त दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर ने विभिन्न बैंकों के कंसोर्टियम से करीब 2900 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। कंपनी पर पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के 270 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) के 226 करोड़ रुपये का बकाया होने का आरोप है।
दोनों बैंकों ने वर्ष 2025 में इन ऋण खातों को धोखाधड़ी (फ्रॉड) की श्रेणी में डालते हुए इसकी सूचना भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को भी दी थी।
कंपनी के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में भी याचिका लंबित है। वहीं, केनरा बैंक ने कंपनी की विभिन्न संपत्तियों की नीलामी के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी किया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने केनरा बैंक, यूनियन बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, यूको बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और आईडीबीआई बैंक सहित कई बैंकों से ऋण लिया था। केनरा बैंक से ऋण लेते समय कंपनी के प्रबंध निदेशक महेंद्र कुमार गुप्ता के अलावा अभिषेक गुप्ता, जितेंद्र मोहन गुप्ता, किरण देवी गुप्ता, विनीत मोहन गुप्ता और मनमोहन गुप्ता गारंटर थे।

