नई दिल्ली, 20 जुलाई। संसद के मानसून सत्र 2026 के पहले दिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सांसदों से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए तथ्य और तर्क आधारित सार्थक चर्चा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संसद का सुचारू संचालन, सकारात्मक संवाद और सामूहिक संकल्प ही देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि यदि मानसून सत्र उत्पादक रहा तो इसका लाभ पूरे देश और समाज को मिलेगा।
संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने मानसून और संसद के मानसून सत्र की तुलना करते हुए कहा कि जब दोनों सक्रिय और उत्पादक होते हैं तो राष्ट्र का कल्याण सुनिश्चित होता है। उन्होंने कहा कि देशवासियों की यही प्रार्थना है कि मानसून भी सक्रिय रहे और संसद का मानसून सत्र भी पूरी तरह उत्पादक साबित हो।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक महीने में भारत ने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और अंतरिक्ष क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने हाल ही में निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप ‘स्काईरूट’ की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि मात्र 28 वर्ष की औसत आयु वाले युवाओं ने भारत को निजी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारतीय युवाओं की असीम क्षमता, आत्मविश्वास और नवाचार की भावना का प्रमाण है तथा इससे विश्व में भारत की प्रतिष्ठा और मजबूत हुई है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि संयोग नहीं बल्कि इस बात का स्पष्ट संदेश है कि भारत के युवाओं की क्षमता और आकांक्षाएं अंतरिक्ष जितनी असीमित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में लागू किए गए सुधारों और नवाचार को बढ़ावा देने वाली नीतियों के कारण आज युवा बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने का साहस दिखा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने हाल ही में राष्ट्र को समर्पित राजस्थान की बड़ी तेल रिफाइनरी, देश के तीसरे सेमीकंडक्टर संयंत्र और दुनिया की सबसे लंबी तथा सबसे शक्तिशाली हरित हाइड्रोजन ट्रेन का उल्लेख करते हुए कहा कि ये उपलब्धियां भारत के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, उद्यमियों, नवप्रवर्तकों और श्रमिकों के सामूहिक परिश्रम का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कीं। पेट्रोलियम उत्पादों, एलपीजी, उर्वरकों और रसायनों की आपूर्ति पर दबाव के बावजूद भारत ने 7.7 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर के साथ दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से विकास करने वाले देश का स्थान बनाए रखा। उन्होंने इसे भारत की आर्थिक मजबूती, नीतिगत स्थिरता और सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश विकास की तेज गति से आगे बढ़ रहा है और अब संसद की सकारात्मक भूमिका इस गति को और अधिक ऊर्जा दे सकती है। उन्होंने कहा कि संसद में विभिन्न दलों के अनुभवी सांसदों का ज्ञान और अनुभव राष्ट्र के लिए बहुमूल्य है। इसलिए आवश्यक है कि सदन में व्यवधानों के बजाय गंभीर, तथ्यपूर्ण और तर्कसंगत चर्चा हो, ताकि देश की आकांक्षाओं के अनुरूप निर्णय लिए जा सकें।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक आवाज को अवसर मिलना चाहिए और प्रत्येक विचार का सम्मान होना चाहिए। संसद का दायित्व है कि राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रनिष्ठा से प्रेरित प्रत्येक विचार को उचित मंच मिले। प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से मानसून सत्र में सक्रिय भागीदारी करने और देशहित में रचनात्मक भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि तथ्य और तर्क के आधार पर होने वाली चर्चाएं भारत को नई दिशा देंगी।
00
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

