बिलासपुर, 21 जुलाई (आरएनएस) सर्पदंश से जुड़ी कथित फर्जी मुआवजा दिलाने की साजिश के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए SIMS पुलिस चौकी में घटना के दौरान तथा उसके बाद पदस्थ रहे दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार दोनों पर मृतकों से जुड़े मामलों की गोपनीय जानकारी कथित गिरोह तक पहुंचाने और परिजनों को सरकारी राहत राशि के लिए भ्रामक दावे करने हेतु तैयार कराने का आरोप है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।
जांच में सामने आया कि आरोपित पुलिसकर्मी कथित तौर पर जैसे ही किसी मृतक का शव SIMS पहुंचता था, उसकी सूचना तत्काल गिरोह के सदस्य महेंद्र मनहर तक पहुंचाते थे। आरोप है कि इसके बाद मनहर अस्पताल पहुंचकर शोकाकुल परिजनों से संपर्क करता, उन्हें आर्थिक सहायता और मुआवजे का प्रलोभन देता तथा मृत्यु का कारण सर्पदंश बताने के लिए राजी करता था। पुलिस का दावा है कि कई मामलों में वास्तविक वजह अलग होने के बावजूद आपदा राहत राशि हासिल करने के उद्देश्य से यह पूरी प्रक्रिया अपनाई जाती थी, जिसमें कुछ परिजन भी लालच में आकर शामिल हो जाते थे।
विवेचना के दौरान एकत्र साक्ष्यों, तकनीकी तथ्यों तथा अन्य उपलब्ध जानकारियों के आधार पर दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में गिरोह के नेटवर्क, आर्थिक लेनदेन और अन्य संभावित सहयोगियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। इसी सिलसिले में दोनों आरोपियों को न्यायालय से रिमांड पर लेकर आगे की पूछताछ की जाएगी तथा मामले के सभी पहलुओं की जांच जारी है।
गिरफ्तार आरोपियों में रामकुमार पाटनवार (40 वर्ष), पिता स्व. देवनारायण पाटनवार, निवासी बंधवापारा, सरकंडा तथा रामेश्वर भास्कर (53 वर्ष), पिता स्व. अंजोर दास भास्कर, निवासी सतनाम नगर, अमेरी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार दोनों पर कथित गिरोह को सूचना उपलब्ध कराने और परिजनों को प्रभावित करने में सहयोग का आरोप है।
फिलहाल, इस कार्रवाई के बाद सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े की जांच नए चरण में पहुंच गई है। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं और आने वाले दिनों में मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

