हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0 में ‘आधुनिक परिवेश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भाषाÓ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
प्रयागराज 22 जुलाई (आरएनएस)। हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0, प्रयागराज के तत्वावधान में आज ‘आधुनिक परिवेश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भाषाÓ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हिन्दुस्तानी एकेडेमी के गांधाी सभागार में किया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में एकेडेमी के सचिव डॉ. अजीत कुमार सिंह ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न और शॉल देकर किया।
अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि ‘एआई से कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं रह गया है। वास्तविक सृजित साहित्य में और एआई के द्वारा सृजित साहित्य में एक बड़ा अन्तर है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सर्वेश पाण्डेय, प्राचार्य, डी.सी.एस.के. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मऊ ने कहा कि ‘वर्तमान दौर को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर के रूप में जाना जा रहा है। जीवन के हर क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का महत्व बढ़ा है। भाषा के दृष्टि से विचार करें तो एआई भाषा के लिए एक चुनौती बनी है। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह, निदेशक, गोबिन्दबल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज ने कृत्रिम बुद्धि और भाषा को रोचक शैली में बताते हुए कहा कि कहते हैं दीवालों के भी कान होते हैं, अब अहर्निश सुनने वाला हमारे साथ का मोबाइल सब कुछ चुपचाप सुनता रहता है। एआई से शब्दों के पंख लग गए हैं।
संगोष्ठी का संचालन डॉ. विनम्रसेन सिंह और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अजीत कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्धानों में प्रो. रामकिशोर शर्मा, डॉ. उदय प्रताप सिंह, रामनरेश तिवारी ‘पिण्डीवासाÓ, डॉ. अनिल कुमार सिंह, जय कृष्ण राय ‘तुषारÓ, डॉ. अमिताभ त्रिपाठी, सुनील दानिश, जनकवि प्रकाश, डॉ. मनोज कुमार यादव, एम. एस. खान सहित शोधार्थी एवं शहर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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