नईदिल्ली,23 जुलाई(आरएनएस)। दिल्ली में संसद मार्च कर रहे छात्रों पर सोमवार को हुई पुलिस लाठीचार्ज की दिल्ली और मुंबई के वकील संगठनों ने निंदा की है। वकीलों ने अपना बयान जारी कर छात्रों के हालिया विरोध-प्रदर्शनों के बीच शांतिपूर्ण सभाओं पर लगाए गए व्यापक प्रतिबंधों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ऐसी कार्रवाइयों को संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक असहमति पर हमला बताया है। साथ ही, लाठीचार्ज, आंसू गैस और निषेधाज्ञा के कथित इस्तेमाल के लिए जवाबदेही की मांग की है।
बार एंड बेंच के मुताबिक, दिल्ली में वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह, राजू रामचंद्रन, चंदर उदय सिंह और संजय हेगड़े सहित 650 वकीलों के समूह ने बयान जारी किया है।
हस्ताक्षरकर्ताओं में वृंदा ग्रोवर, प्रशांत भूषण और शाहरुख आलम जैसे पूर्व न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल हैं।
बयान में कहा, छात्रों के साथ संवाद की बजाय हिंसा का व्यवहार देखना अस्वीकार्य है। हम उन सभी के साथ एकजुटता से खड़े हैं जिन्हें नुकसान पहुंचा गया, डराया और आघात पहुंचाया गया है।
वकीलों ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के विरुद्ध पुलिस की बर्बरता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा और असहमति व्यक्त करने के अधिकार के सिद्धांतों पर हमला है।
उन्होंने जोर दिया, भारत की संसद कोई ऐसी संस्था नहीं है जो नागरिकों की पहुंच से बाहर हो। अत्यधिक बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन ने लाठीचार्ज के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया था।
बॉम्बे बार एसोसिएशन ने भी लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर चिंता जताई है।
संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक शासन की एक अनिवार्य विशेषता है और एफआईआर दर्ज कराने जैसी धमकी भरी रणनीति अपनाने की भी निंदा की।
इससे पहले, वरिष्ठ अधिवक्ता जनक द्वारकादास, नवरोज सीरवाई, गायत्री सिंह, मिहिर देसाई और हरीश जगतानी सहित 120 से अधिक वकीलों ने मुंबई पुलिस आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी लगातार निषेधाज्ञा आदेशों की निंदा की थी।
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