रायपुर, 09 नवम्बर (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ के बारनवापारा अभ्यारण्य में फिर से टाइगर की मौजूदगी दर्ज की गई है। वन विकास निगम क्षेत्र में टाइगर मूवमेंट के संकेत मिलने के बाद वन विभाग अलर्ट पर है। अधिकारियों ने सर्च ऑपरेशन तेज करते हुए इलाके में गश्त और निगरानी बढ़ा दी है।
दरअसल, बलौदा बाजार और महासमुंद जिले की सीमा पर स्थित वन विकास निगम क्षेत्र में बाघ के पैरों के निशान और मूवमेंट के संकेत मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, यह बाघ पड़ोसी राज्य के जंगलों से यहां पहुंचा है। फिलहाल विभाग बाघ के मूवमेंट पर नजर रखे हुए है और इलाके में कैमरा ट्रैप एवं पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है ताकि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सर्च ऑपरेशन जारी, आवाजाही पर रोक,
वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों को फि लहाल जंगल के नजदीक जाने से रोका गया है। पर्यटकों के लिए कुछ रास्तों पर अस्थायी रोक लगाई गई है। विभाग का कहना है कि इससे बाघ को सुरक्षित माहौल मिलेगा और किसी तरह की अनहोनी से बचा जा सकेगा। पिछले वर्ष भी इसी क्षेत्र में एक बाघ सक्रिय था, जिसे बाद में ट्रेंकुलाइज कर गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व भेजा गया था।
हाथियों की मौजूदगी ने बढ़ाई चुनौती
इसी इलाके में फिलहाल 28 हाथियों का दल भी सक्रिय है, जिससे वन विभाग की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कुछ दिन पहले हाथियों ने हरदी गांव में एक व्यक्ति की जान ले ली थी और तीन हाथी कुएं में गिर गए थे, जिन्हें बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा था। हाल ही में हाथियों ने अभ्यारण्य के अधीक्षक की गाड़ी को भी नुकसान पहुंचाया था।
संरक्षण के लिहाज से अच्छी खबर
बारनवापारा में बाघ की मौजूदगी यह दर्शाती है कि जंगल का पारिस्थितिकी तंत्र बाघों के अनुकूल हो रहा है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह न सिर्फ क्षेत्र के लिए बल्कि पूरे राज्य के वन्यजीव संरक्षण अभियान के लिए एक सकारात्मक संकेत है। विभाग ने पूरे क्षेत्र में चौकसी बढ़ाई है और किसी भी वन्य गतिविधि की सूचना तुरंत देने की अपील की है।
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