कोरबा 10 नवंबर (आरएनएस)। शहर से इमलीडुग्गू चैक तक वाहनों की आवाजाही के लिए बनी मुड़ापार बायपास पर मानिकपुर रेलवे फाटक से स्टेशन के सेकंड एंट्री के आगे कोल साइडिंग मोड़ तक सडक डस्ट से पटा पड़ा है। इसकी वजह से भारी वाहन के गुजरते ही मार्ग पर धूल का गुबार छा जाता है।
यही कारण है कि शहरवासियों ने उक्त बायपास सडक से दूरी बना ली है। शहर के घंटाघर-निहारिका समेत जिला मुख्यालय की ओर से इमलीडुग्गू चैक, जो अब गौमाता चैक के नाम से जाना जाता है, उस ओर आवाजाही के लिए राहगीर ट्रांसपोर्टनगर से सुनालिया चैक होते हुए गुजरते हैं। इसकी वजह से सुनालिया पुल पर दिनभर रुक-रुककर जाम लगता है। शहर में नो एंट्री सिस्टम लागू होने के बाद अब सुबह से रात तक मुड़ापार बायपास में भारी वाहनों का दबाव कम होने और ट्रांसपोर्टनगर से इमलीडुग्गू जाने की अपेक्षा बायपास से 2 किमी की दूरी कम होने के बाद भी राहगीर धूल के गुबार के डर से उक्त मार्ग का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। डस्ट के कारण ही रेलवे के सेकंड एंट्री की ओर टिकट घर व पार्किंग की सुविधा शुरू होने के बाद भी यात्रियों की संख्या नहीं बढ़ सकी है। मुड़ापार बायपास का इस्तेमाल हो सके और सुनालिया पुल के साथ-साथ संजय नगर फाटक पर यातायात का दबाव कम हो सके, इसके लिए प्रशासन पुलिस भी ठोस पहल नहीं कर रही है।
सर्वमंगला चैक से उरगा और बलौदा की ओर जाने सर्वमंगला नहर बायपास बनने के बाद से कोयलांचल से शहर के भीतर से गुजरकर उरगा होते गंतव्य की ओर आवाजाही करने वाले भारी वाहनों का दबाव कम हो गया है। वहीं सुबह से रात 10 बजे तक नो एंट्री लगे होने से सीएसईबी चैक व इमलीडुग्गू चैक की ओर से भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक है। इस कारण नो एंट्री के टाइमिंग तक बायपास पर यातायात का दबाव नहीं रहता है, लेकिन मानिकपुर खदान से रेलवे साइडिंग के बीच कोयला परिवहन में लगे भारी वाहन ही बायपास का इस्तेमाल करते हैं। साइडिंग तक पहुंचने अलग से सडक नहीं बनाई गई है। इस तरह बायपास कोल साइडिंग का रास्ता बनकर रह गया है।
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