नई दिल्ली ,16 नवंबर। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपनी एक महत्वपूर्ण डिजिटल सुविधा को बंद करने का ऐलान किया है। बैंक ने घोषणा की है कि 30 नवंबर, 2025 के बाद ‘एमकैशÓ (द्वष्टड्डह्यद्ध) भेजने और क्लेम करने की सुविधा को बंद कर दिया जाएगा।
यह सुविधा बैंक के ह्रठ्ठद्यद्बठ्ठद्गस्क्चढ्ढ और ङ्घह्रहृह्र रुद्बह्लद्ग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं होगी। इसका मतलब है कि ग्राहक अब बिना लाभार्थी (क्चद्गठ्ठद्गद्घद्बष्द्बड्डह्म्4) को जोड़े पैसे भेजने के लिए इस खास सर्विस का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
क्या थी द्वष्टड्डह्यद्ध सुविधा?
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वष्ट्रस्॥ एक ऐसी सर्विस थी, जिसके जरिए कोई भी एसबीआई इंटरनेट बैंकिंग ग्राहक, किसी को लाभार्थी के रूप में रजिस्टर्ड किए बिना भी फंड ट्रांसफर कर सकता था। इसके लिए सिर्फ प्राप्तकर्ता के मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी की जरूरत होती थी।
प्राप्तकर्ता को एक एसएमएस या ईमेल के जरिए 8 अंकों का पासकोड और एक सुरक्षित लिंक मिलता था। इस लिंक के जरिए या स्ह्लड्डह्लद्ग क्चड्डठ्ठद्म द्वष्ट्रस्॥ मोबाइल ऐप से वह पैसा क्लेम कर सकता था, चाहे उसका खाता किसी भी बैंक में हो।
बैंक ने दिया यह संदेश
एसबीआई ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक संदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है: 30 नवंबर के बाद ऑनलाइनएसबीआई और योनो लाइट में एमकैश (भेजना और दावा करना) फैसिलिटी उपलब्ध नहीं होगी। कृपया थर्ड पार्टी के लाभार्थियों को फंड ट्रांसफर करने के लिए यूपीआई, आईएमपीएस, एनईएफटी, आरटीजीएस आदि जैसे वैकल्पिक लेनदेन माध्यमों का उपयोग करें।
अब क्या हैं विकल्प?
बैंक ने ग्राहकों से थर्ड पार्टी को फंड ट्रांसफर करने के लिए अन्य सुरक्षित और अधिक उपयोग किए जाने वाले डिजिटल पेमेंट विकल्पों का इस्तेमाल करने का आग्रह किया है। ग्राहक अब द्वष्टड्डह्यद्ध की जगह यूपीआई (क्कढ्ढ) जैसे विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं, जिसमें क्च॥ढ्ढरू स्क्चढ्ढ क्कड्ड4 या किसी अन्य क्कढ्ढ ऐप के जरिए आसानी से मोबाइल नंबर या ङ्कक्क्र का उपयोग करके पैसे भेजे जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, वे तुरंत पैसे ट्रांसफर करने के लिए आईएमपीएस (ढ्ढरूक्कस्) या फिर एनईएफटी (हृश्वस्नञ्ज) और आरटीजीएस (क्रञ्जत्रस्) जैसी सेवाओं का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
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