आरोपी मोहम्मद अली को मिली जमानत
प्रयागराज 17 नवंबर (आरएनएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मुकदमों के तेजी से निस्तारण के लिए जिला अदालतों में स्पीच-टू-टेक्स्ट एआई ट्रांसक्रिप्शन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बयान दर्ज करने जैसी उन्नत तकनीकें अपनाने का निर्देश दिया है। कहा है कि लंबित मामलों के बोझ और गवाहों की गैरहाजिरी से जूझ रही न्यायिक प्रक्रिया में अब तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य हो गया है।
इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने संभल हिंसा के आरोपी मोहम्मद अली को जमानत दे दी। साथ ही संभल के जिला जज को निर्देश दिया है कि वह इस केस को किसी विशेष अदालत में स्थानांतरित कर एक साल में ट्रायल पूरा कराएं। वहीं, पुलिस अधीक्षक को भी गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
घटना 24 नवंबर 2024 की है, जब कोर्ट अमीन और पुलिस टीम संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के लिए पहुंची थी। आरोप है कि 700–800 की भीड़ ने टीम पर पथराव व फायरिंग की। इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। जांच के बाद पुलिस ने 44 लोगों पर आरोपपत्र दाखिल किया, जबकि एफआईआर अज्ञात भीड़ के खिलाफ थी। इन 44 में से 37 आरोपी पहले ही जमानत पा चुके हैं। लिहाजा, समानता के आधार पर कोर्ट ने मोहम्मद अली की जमानत भी मंजूर कर ली। वह चार दिसंबर 2024 से जेल में बंद है। कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी तादाद में अज्ञात भीड़ में से केवल 44 लोगों पर आरोपपत्र दाखिल किया जाना दर्शाता है कि कई निर्दोष भी फंस सकते हैं। इसलिए समानता के आधार पर जमानत देना न्यायसंगत है।
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