स्वामी श्री गोविन्ददेव गिरिजी महाराज के सान्निध्य में पुणे में आयोजित हुआ भारतात्मा वेद पुरस्कार महोत्सव
# “भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा वेद है”: स्वामी गोविन्ददेव गिरिजी महाराज
नई दिल्ली ,18 नवंबर (आरएनएस)। भारतात्मा श्री अशोकजी सिंघल की पुण्य स्मृति में आयोजित भारतात्मा वेद पुरस्कार वितरण महोत्सव पुणे स्थित दादासाहेब दारोड़े सभागृह में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन स्वामी श्री गोविन्ददेव गिरिजी महाराज के पावन सान्निध्य में हुआ, जबकि आचार्य प्रद्युम्नजी महाराज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर स्वामी गोविन्ददेव गिरिजी महाराज ने कहा कि भारत की आत्मा वेद है। विश्व में प्रवाहित होने वाला संपूर्ण ज्ञान वेदों से ही उद्धृत है और भारतीय संस्कृति की मूल चेतना वेदों में ही निहित है। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा वेद है और अशोकजी सिंघल की आत्मा भी वेद है। समारोह में सिंघल फाउंडेशन के मुख्य न्यासी सलिल सिंघलजी ने पुरस्कारों के उद्देश्य तथा पिछले नौ वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतात्मा वेद पुरस्कार उत्कृष्ट वेदविद्यार्थी, आदर्श वेदाध्यापक और उत्तम वेदविद्यालय—इन तीन श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं। इन पुरस्कारों में क्रमशः तीन लाख, पाँच लाख तथा सात लाख रुपये की राशि, प्रमाणपत्र और स्मृतिचिह्न समाहित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पुरस्कारों के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से की जाती है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है। भारतात्मा वेद पुरस्कार 2025 की उत्कृष्ट वेदविद्यार्थी श्रेणी का पुरस्कार हैदराबाद के नोरि केदारेश्वर शर्मा को प्रदान किया गया। वे कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा के घनान्त विद्वान हैं। उन्होंने रघुवंश जैसे संस्कृत साहित्यिक ग्रंथों के साथ-साथ प्रातिशाख्य, वर्णक्रम जैसे विशिष्ट ग्रंथों का भी अध्ययन किया है। नोरि केदारेश्वर ने गुरु श्रीराम घनपाठीजी के सान्निध्य में वेद के षडङ्गों का अध्ययन किया तथा तत्पश्चात् श्री बिल्वेश शास्त्रीजी के मार्गदर्शन में सम्पूर्ण व्याकरण का अध्ययन पूर्ण किया। पुरस्कारों की अंतिम चयन सूची में विद्यार्थी श्रेणी से साम्भाजीनगर के केदारेश्वर शर्मा और पुणे के श्रीनिधि स्वानन्द धायगुडे, अध्यापक श्रेणी से पुणे के स्वानन्द शिवराम धायगुडे तथा वेदविद्यालय श्रेणी से तमिलनाडु के विल्लुपुरम् स्थित शंकरमठ वेदविद्यालय और आंध्रप्रदेश के कपिलेश्वरपुरम् स्थित श्री सर्वाराय वेदविद्यालय सम्मिलित थे। भारतात्मा वेद पुरस्कार महोत्सव न केवल वैदिक अध्ययन और अध्यापन की परंपरा को सम्मानित करता है, बल्कि इस प्राचीन ज्ञान–धारा के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए नई ऊर्जा भी प्रदान करता है।

