नई दिल्ली,लखनऊ 19 नवंबर (आरएनएस )। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार और झारखंड की राज्यवार समीक्षा बैठक कर संगठन की प्रगति, जनाधार विस्तार और पिछले दिशा-निर्देशों पर हुई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना ही बहुजन आंदोलन को गति देगा और यही रास्ता परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर और मान्यवर कांशीराम द्वारा दिखाए गए आत्म-सम्मान और स्वाभिमान के मिशन को आगे बढ़ाएगा।बैठक में मायावती ने स्पष्ट कहा कि पश्चिम और दक्षिण भारत के इन राज्यों में भी बहुजन समाज के लोग उसी सामाजिक और आर्थिक विषमता का सामना कर रहे हैं, जिसका अनुभव उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे हिन्दी भाषी राज्यों में होता है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन में इन वर्गों की प्रभावी भागीदारी नहीं होने के कारण दलित, आदिवासी, पिछड़े और मुस्लिम समाज के करोड़ों लोग आज भी शिक्षा, राजनीति और अर्थव्यवस्था में पिछड़ते जा रहे हैं।उत्तर प्रदेश में बीएसपी शासन के दौरान हुए सामाजिक सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक षड्यंत्रों के चलते फिर से सांप्रदायिकता, जातिवाद और भेदभावपूर्ण नीतियों ने जगह बना ली है, जिससे बहुजन समाज को दोबारा गरीबी, लाचारी और असमानता के दायरे में धकेलने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने आरक्षण पर हो रहे हमलों, बैकलॉग न भरने और संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने को अत्यंत चिंताजनक बताया।मायावती ने कहा कि आज चुनाव जीतने के तौर-तरीके बदल गए हैं। पहले धनबल और सत्ता का दुरुपयोग चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करता था, लेकिन अब सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक धन का उपयोग जनमत को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव के हालिया परिणामों को उन्होंने चेतावनी और सीख दोनों बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में चुनावी मुकाबला कई गुना कठिन हो गया है और संगठन को अत्यंत सतर्क एवं मजबूत रहना होगा।उन्होंने देश के 12 राज्यों में चल रहे वोटर लिस्ट के सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यदि इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो बड़ी संख्या में लोग अपने संवैधानिक मतदान अधिकार से वंचित हो जाएंगे। इसी क्रम में उन्होंने राज्यों की इकाइयों को निर्देश दिया कि बूथ स्तर तक जिम्मेदारी तय की जाए और हर योग्य मतदाता का नाम सूची में सुनिश्चित कराया जाए।महाराष्ट्र इकाई से मिली रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मायावती ने कहा कि किसान, मजदूर और गरीब परिवार सरकार की धन्नासेठ समर्थक नीतियों के कारण भारी संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के बताए रास्ते पर चलकर और निरंतर संघर्ष के माध्यम से ही बहुजन समाज सशक्त और आत्मनिर्भर बन सकता है।मायावती ने 9 अक्टूबर को लखनऊ में कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर हुए बीएसपी के विशाल आयोजन में दक्षिण और पूर्वी भारत के राज्यों से पहुंचे पदाधिकारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैसा ही जोश और मिशनरी भावना अपने-अपने राज्यों में भी लानी होगी ताकि ‘शोषित से शासक वर्गÓ बनने का बहुजन लक्ष्य पूरा हो सके और संविधान की मानवतावादी, कल्याणकारी अवधारणा वास्तविकता में बदल सके।बैठक के समापन पर उन्होंने निर्देश दिया कि 6 दिसम्बर को बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस के कार्यक्रम उन सभी राज्यों में मिशनरी भावना से आयोजित किए जाएँ। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह आयोजन किसी भी राजनीतिक दल की तरह दिखावटी नहीं होना चाहिए, बल्कि बहुजन आंदोलन की भावना, समर्पण और सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए।
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