0-भूकंप के बड़े झटके से कोलकाता में मच सकता विनाश लीला
0-जर्जर भवनों की अधिकता से बड़ाबाजार में प्राकृतिक आपदा से हो सकते है काफी नुकसान
कोलकाता,21 नवंबर (आरएनएस)। बंगाल से सटे भारत के पड़ोसी बांग्लादेश में आज आए भूकंप से जहां कई लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं काफी नुकसान की भी खबर है। जबकि आज ही महानगर कोलकाता सहित बंगाल के कई जगहों पर भी भूकंप के झटकों ने एक बार फिर कोलकाता की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़ें कर दिए है। महानगर कोलकाता में निर्माणाधीन इमारतों के धराशायी होने की तमाम घटनाएं घट चुकी है। वहीं कई साल पहले गार्डेनरीच में एक निर्माणाधीन इमारत के धराशायी होने की घटना में 13 लोगों की मौत हो गई थी और उक्त घटना से देश भर में तहलका मच गया था और सीधे व्यवस्था सवालों के दायरे में आ गई थी।
जानकारों ने कहा कि, कोलकाता शहर बंगाल के खाड़ी के काफी करीब है और यहां भूकंप के खतरे कम नहीं है। लेकिन सवाल उठ रहा है कि महानगर कोलकाता भूंकप के सम्भावित घातक खतरों के कितने करीब है। भूवैज्ञानिकों का कहना है महानगर में भूंकप के सम्भावित खतरे से व्यापक जान माल का नुकसान हो सकता है। वैसे भी कोलकाता हुगली नदी के तट पर बसा है और यहां जर्जर व पुराने भवनों की संख्या भी कम नहीं है। मध्य कोलकाता के बड़ाबाजार इलाके को जर्जर व पुराने भवनों के मामले में उदाहरण के स्वारुप देखा जा सकता है। कोलकाता नगर निगम भी तमाम बार जर्जर व पुराने भवनों को लेकर चिंता व्यक्त कर चुका है। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि कोलकाता किसी बड़े भूकंप का सामना करने के लिए सक्षम नहीं है। हाल के एक अध्ययन से पता चलता है कि साल्टलेक सहित कोलकाता के प्रमुख तमाम हिस्से किसी भी क्षण विनाशकारी भूकंप का शिकार हो सकते हैं। शहर में जनसंख्या का भारी घनत्व को देखते हुए, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भूकंप का कोई भी बड़ा झटका शहर के लिए घातक हो सकता है! कोलकाता जोन 3 में आता है। भूवैज्ञानिकों का कहना है कि कोलकाता और इसके आसपास के कई जिले भी भूकंप के बड़े झटके को झेलने में सक्षम नहीं है। ऐसे में महानगर में भूकंप के बड़े झटके आये तो विक्टोरिया मेमोरियल, भारतीय संग्रहालय, बिड़ला तारामंडल और कोलकाता की कई गगनचुंबी इमारतों के नष्ट होने का खतरा है ! आसनसोल, सिलीगुड़ी जैसे जगहें भी इस मामले में खतरनाक स्थिति में है। दस्तावेजों से पता चलता है कि, 1737 के दौरान एक चक्रवाती तूफान के साथ-साथ आए भूकंप की घटना से तत्कालीन कलकत्ता जो अब कोलकाता हो गया है में लगभग 3 लाख लोगों की मौत हुई थी। इस दौरान व्यापक संख्या में पशुओं की भी मौत हुई थी और काफी नुकसान भी हुआ था। बहरहाल एक विशद चिंता का विषय कोलकाता की सुरक्षा को लेकर है। क्योंकि यह शहर बंगाल बेसिन पर स्थित है और भारत के क्षेत्रीय मानचित्र के भूकंपीय क्षेत्र 3 और 4 की सीमा पर स्थित है। कोलकाता 1897 के शिलांग भूकंप, 1906 के कलकत्ता भूकंप और 1964 के कलकत्ता भूकंप से काफी प्रभावित रहा है।
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