प्रयागराज में पराली से कंप्रेस्ड बायो गैस बनाने का प्लांट बना मददगार
कृषि विभाग का सघन कृषक जागरूकता अभियान और हार्वेस्टिंग मशीनों में सब्सिडी से पराली जलाने मामलों में आई कमी
प्रयागराज 23 नवंबर (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश में किसानों की आय में वृद्धि , फसल अवशेष प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए सतत प्रयास कर रही है। खेतों में पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस , पोटैशियम और सल्फर जैसे पोषक तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही मिट्टी की सेहत के लिए आवश्यक फायदेमंद जीवाणु, केंचुए और सूक्ष्म जीव भी पराली जलाने से नष्ट हो जाते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता में तेजी से कमी आ रही जिससे निपटने के लिए योगी सरकार ने प्रभावी कदम उठाए हैं।
प्रयागराज में धान और गेहूं के फसल अवशेष पराली के मुख्य संगठक हैं । जिले में अकेले धान से 5 लाख मीट्रिक टन पराली एक सीजन में होती है । इसके अलावा सात 3 लाख मीट्रिक टन पराली गेहूं के फ़सल अवशेष से आती है । मशीनीकरण का दौर आने के पहले यह पराली पशुपालक अपने पशुओ को खिलाते थे जहां इसकी खपत हो जाती थी लेकिन अब गांवों में भी मशीनों के आने से पशुओं की सख्या बहुत कम रह गयी है जिससे किसान इसे खेतो में जलाने लगे । लेकिन अब पराली का प्लांट इस समस्या से छुटकारा दिलाएगा । योगी सरकार की पराली प्रबंधन नीति से अब पराली भी किसानों के लिए आमदनी का जरिया बन गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की तरफ से जिले के नैनी इलाके में स्थापित प्लांट में पराली से कंप्रेस्ड बायो गैस बनाई जा रही है। इस प्लांट की प्रतिदिन की क्षमता 60 मीट्रिक टन की है । इसके लिए पराली यहाँ के किसानो से खरीदी जा रही है जिससे किसानो को भी अतिरिक्त आय हो रही है । इस प्लांट में मीथेन गैस बनाई जाती है जिसके बनाने के लिए 70 प्रतिशत पराली, 30 प्रतिशत फल-फूल, साग-सब्जी का मंडियों में निकलने वाला कचरा प्रयोग में लाया जाता है। इसके लिए मेजा के डाबर तथा चंदपुर गांव में पराली डंपिंग सेंटर बनाए गए हैं । खेतों में ट्रैक्टर से जुड़ी एक मशीन बेलर के जरिए पराली का ग_र बनाया जाता है और फिर ट्रैक्टर ट्राली पर लादकर उसे प्लांट तक पहुंचाया जाता है। स्थानीय लोगों को भी इससे रोजगार मिला है।
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पराली प्रबंधन के लिए सघन अभियान
प्रयागराज। प्रदेश में पराली प्रबंधन के लिए बनाई गई समावेशी नीति में सबसे महत्वपूर्ण कदम है किसानों को फसल अवशेष जलाने के खेतों और पर्यावरण पर पडऩे वाले प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जागरूक करना। प्रभारी संयुक्त निदेशक कृषि एसके राय का कहना है कि विभाग की तरफ से किसानों के बीच जाकर गोष्ठियों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। दूसरी तरफ सरकार फसल अवशेष प्रबंधन के लिए इस्तेमाल होने वाली उन अत्याधुनिक कार्बाइन हार्वेस्टिंग मशीनों की खरीद पर सब्सिडी दे रही है जिनसे की गई कटाई से डंठल ही नहीं बचते। कृषि विभाग की तरफ से बायो डि-कंपोजर भी किसानों को वितरित किए गए हैं जिन्हें वह फसलों की कटाई के बाद खेतों में यूरिया के साथ मिलाकर डाल सकता है जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
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