मानक के खिलाफ सेंटर , पेपर में सेटिंग भेदभाव सम्बंधित आरोप साथ लिखा पत्र
प्रयागराज 24 नवंबर (आरएनएस)। महाविद्यालय के प्रबंधकों ने प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं।
आरोप लगाने के साथ प्रबंधकों के समूह ने प्रशासन को एक पत्र लिखा है। जिसमें कहा गया है की रज्जू भैया विश्वविद्यालय पहले परीक्षा केंद्रों की सूची वेबसाइट पर जारी करता था लेकिन विगत तीन सालों से छिपाया जाता है और मानक के विपरीत परीक्षा सेंटर बनाये जा रहे हैं। ऐसे केंद्र बनाये जा रहे हैं जो पहले से बदनाम रहे हैं। सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं तो प्रबंधन में कमी है। पत्र में आरोप लगाया गया है की परीक्षा केंद्र बनाने में परीक्षा नियंत्रक की राय भी नहीं ली जाती। कुछ लोगों द्वारा मनमानी तरीके से केंद्र बनाये जा रहे हैं।
पत्र में केंद्र के अलांवा छात्रों के साथ भेदभाव का भी आरोप लगाया गया है। कहा गया की विश्विद्यालय में पढ़ऩे वाले छात्रों के पेपर सेटिंग बिना कोडिंग के उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन विश्विद्यालय के टीचरों से कराया जाता है और अन्य महाविद्यालयों के छात्रों के कापियों का मूलयांकन परीक्षा नियंत्रक द्वारा कराया जाता है। छात्रों के नंबर के साथ भेदभाव होता है।
स्केलिंग के तहत प्रैक्टिकल विषयों में नंबर के बारे में भेदभाव सम्बंधित आरोप के साथ साथ प्रबंधकों का एक आरोप यह भी है कि विश्विद्यालय लाभ के लिए मानक के विपरीत परीक्षा केंद्रों पर हजारों छात्रों कि परीक्षा कराता है और वहां उड़ऩ दस्ता भी नहीं जाता है। जिससे सामूहिक नकल होते हैं। एक ही तरह के उत्तर वाली सामूहिक कापियों के पकड़ऩे के बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई और जहां ऐसा नहीं हो रहा था उन्हें नक़ल सेंटर के रूप में डाला गया।
इस तरह से प्रबंधकों ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और आरोप लगाया गया कि कुछ विद्यालयों खिलाफ गैर साक्ष्य के कार्यवाही की गयी, जिसका उद्देश्य धनार्जन है। यहां तक कि हर बार नकल करने का प्रतिशत बदलता रहता है और जिस महाविद्यालय के खिलाफ इच्छित कार्यवाही करनी होती है उसके अनुसार नियम बदल जाते हैं।
आरोप के तहत यह भी पत्र में लिखा गया कि फीस कई तरीकों से ली जाती है जिसमें परीक्षा शुल्क, प्रैक्टिकल शुल्क , विकास शुल्क, डिग्री शुल्क और अन्य शुल्क हर साल छात्रों से लिया जाता है। यहाँ तक कि कुछ रुपये डिग्री में खर्च होने के बावजूद बिना किसी शासनादेश के छह सौ रुपया लिया जाता है। हर साल प्रवेश परीक्षा के नाम पर फीस ली जाती है जबकि कोई प्रवेश परीक्षा नहीं होती है।
इस तरह से रज्जु भइया विश्वविद्यालय के खिलाफ कई आरोप लगे जिसपर अभी विश्वविद्यालय का कोई जवाब नहीं आया है। अभी हाल के ही दिनों में सैकड़ों प्रबंधक विश्विद्यालय परिसर में अपनी शिकायत लेकर पहुंचे थे।
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