-पूर्व मंत्री ने तेजनारायण पाण्डेय पवन ने चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया पर लगाए गंभीर आरोप
अयोध्या 27 नवंबर (आरएनएस )। एसआईआर फॉर्म को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के नेता व पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय पवन ने गुरूवार को शाने अवध सभागार में प्रेसवार्ता आयोजित कर चुनाव आयोग व भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाया हैं। पवन पाण्डेय का कहना है कि भाजपा एसआईआर प्रक्रिया का दुरुपयोग कर पिछड़े वर्ग के वोट कटवाने की साजिश कर रही है। उनका आरोप है कि निर्वाचन आयोग 2003 की पुरानी और त्रुटिपूर्ण सूची के आधार पर फॉर्म भरवा रहा है, जिसमें नाम, पिता का नाम, पता और मोहल्ले जैसे कई विवरण गलत हैं।
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने खुद अपना और परिजनों का विवरण दर्ज किया, लेकिन पोर्टल पर नॉट फाउंड दिखा, जिससे ऑनलाइन सिस्टम की खामियां उजागर होती हैं। उनका कहना है कि अयोध्या का पूरा मैप उपलब्ध नहीं है। जिससे लोग अपनी जानकारी सही तरीके सेफीड नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही उनका आरोप है कि 80 प्रतिशत वोटरों को यह भी पता नहीं कि उनका फॉर्म स्वीकार हुआ या नहीं, जिससे चुनाव के समय बड़ा भ्रम पैदा हो सकता है। सपा नेता का आरोप है कि कई बीएलओ अपने वस्ता भाजपा कार्यकर्ताओं को सौंप रहे हैं, जिससे मनमर्जी से वोट कटवाने की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि बीएलओ सही प्रशिक्षण नहीं ले पाए हैं और कई घरों तक फॉर्म पहुंचे ही नहीं, जबकि अंतिम तिथि 4 दिसंबर निर्धारित है। पवन पांडेय के अनुसार सूची में दर्ज गलतियों ने स्थिति और खराब कर दी है। कई पुरुषों को महिला दिखा दिया गया है, जातियां बदल गई हैं और कई नाम अयोध्या से हटाकर दूसरी विधानसभा में डाल दिए गए हैं। सपा ने मांग की है कि कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए, प्रक्रिया को 3 से 5 महीने बढ़ाया जाए और घर-घर जाकर फॉर्म भरवाए जाएं तथा जाएं तथा रसीद दी जाए ताकि मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रह सकें।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा कराई जा रही एसआईआर प्रक्रिया की वास्तविकता ज़मीनी स्तर पर बेहद चिंताजनक है। नामित प्रशासनिक अधिकारी अपने कर्तव्यों का सही से निर्वहन नहीं कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप मतदाताओं को भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है। फॉर्म घर-घर नहीं पहुँचाया जा रहा है, और तय की गई कम अवधि के कारण बीएलओ अत्यधिक दबाव और तनाव में काम कर रहे हैं। स्पष्ट है कि या तो बीएलओ की संख्या बढ़ाई जाए या प्रक्रिया की अवधि में तत्काल विस्तार किया जाए, ताकि हर नागरिक तक सूचना और फॉर्म सही समय पर पहुँचे तथा उनका नाम मतदाता सूची में शामिल हो सके। उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर सवाल यह है कि अयोध्या जैसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के शहर का चुनाव आयोग के पास कोई समुचित मानचित्र ही उपलब्ध नहीं है। पवन पांडेय ने कहा कि मेरे पिता और परिवार के कई सदस्यों का नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज है, फिर भी हमारे नाम को ‘सूचीÓ में धकेला जा रहा है। यह समस्या केवल हमारे परिवार की नहीं, बल्कि पूरे अयोध्या की है, जहाँ हजारों योग्य मतदाताओं के नाम संदेह सूची में डाले जा रहे हैं। जब चुनाव आयोग की तैयारी पूरी नहीं थी, न ही आवश्यक दस्तावेज और बुनियादी डेटा उपलब्ध था, तो एसआईआर प्रक्रिया में इतनी जल्दबाज़ी क्यों की जा रही है ? यह जल्दबाज़ी केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने वाली गंभीर चूक है। लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को मतदान का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। किसी भी नागरिक को मताधिकार से वंचित करना लोकतंत्र का हनन है और किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव में लोकतंत्र का हनन लोकतंत्र की हत्या के समान है। उन्होंने कहा कि हम चुनाव आयोग से मांग करते हैं कि एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए, बीएलओ को पर्याप्त सहयोग और समय दिया जाए और प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
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