-साकेत महाविद्यालय में सम्पन्न हुआ सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण
अयोध्या,29 नवंबर (आरएनएस)। का.सु. साकेत महाविद्यालय की रोड सेफ्टी क्लब द्वारा शासन के दिशा निर्देशों के अनुरूप शनिवार को सड़क सुरक्षा जागरूकता पर आधारित फर्स्ट रिस्पांडर ट्रेनिंग, डिफेंसिव ट्रेनिंग, प्राथमिक चिकित्सा और सीपीआर प्रशिक्षण का कार्यक्रम प्राचार्य प्रो. दानपति तिवारी के निर्देशन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्य प्रो. नर्वदेश्वर पांडेय, प्रो. अनुराग मिश्र, आक्टा विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के प्रतिनिधि डॉ. वेद प्रकाश वेदी द्वारा कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दानपति तिवारी ने यातायात नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित गाड़ी चलाने व सरकार के द्वारा चलाए जाने वाले इस जन जागरूकता कार्यक्रम में अपना अहम योगदान देने के लिए कहा साथ ही उन्होंने छात्रों से दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट लगाकर गाड़ी चलाने की बात कही। प्रो. नर्वदेश्वर पांडेय ने जीवन अनमोल है बताते हुए सुरक्षित गाड़ी चलाने के लिए कहा। प्रो. अनुराग मिश्र ने यातायात नियमों का पालन करने, सावधानी से गाड़ी चलाने एवं दूसरों की गलतियों से होने वाली दुर्घटनाओं से बचकर चलने व डिफेंसिव ड्राइविंग के विषय में बताया। डॉ. वेद प्रकाश वेदी ने सड़क दुर्घटनाओं से हो रही मौतों को कम करने व देश के इस मूहिम में अपना योगदान देकर देश के नागरिक होने के कर्तव्य को निभाने की बात कही। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर सड़क सुरक्षा डॉ. अखिलेश कुमार ने प्रशिक्षण के विषय फर्स्ट रिस्पांडर, डिफेंसिव ड्राइविंग, प्राथमिक चिकित्सा एवं सीपीआर विषय पर विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि हमें फर्स्ट रिस्पांडर बनने की जरूरत है। यदि हमारे जीवन में ऐसा क्षण आए तो निश्चय ही हमें भागना नहीं चाहिए, अपितु दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की सहायता करनी चाहिए। फर्स्ट रिस्पांडर वही है जो दुर्घटना होने पर मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए किसी की जान बचाने की साहस करें, वहां से भागे न। ऐसा करने वाले को सरकार के द्वारा सम्मानित भी किया जाता है। उन्होंने बताया कि डिफेंसिव ड्राइविंग अर्थात सम्भावित खतरों को पहचान कर सुरक्षात्मक गाड़ी चलानी चाहिए यदि कोई दुर्घटनाग्रस्त हो जाए तो उसके प्राथमिक उपचार हेतु नजदीकी अस्पताल पर उसे पहुंचना चाहिए एंबुलेंस को सूचना देना चाहिए या यातायात से जुड़े संबंधित व्यक्ति को सूचित करना चाहिए। उन्होंने सीपीआर को बताते हुए कहा कि सीपीआर एक प्राथमिक उपचार तकनीक है, जिसका प्रयोग करते समय व्यक्ति को बहुत ही सावधानी बरतनी चाहिए। इसमें यदि दुर्घटनाग्रस्त या किसी भी व्यक्ति के जो स्वांस नहीं ले पा रहा है, जिसकी धड़कने नहीं चल रही हैं, ऐसे व्यक्तियों को होश में लाने के लिए सीपीआर तकनीक का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि सीपीआर तकनीक अपनाते समय हर 30 बार पंप देने के बाद दो बार मुंह से सांस अवश्य देनी चाहिए। ऐसा हमें तब तक करते रहना चाहिए जब तक वह होश में ना आ जाए या कोई उपचार हेतु डॉक्टर या चिकित्सा व्यवस्था न हो जाए। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. रीमा सोनकर ने किया। इस अवसर पर इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपना सहयोग रोड सेफ्टी क्लब के सदस्य सूरज प्रसाद, डॉ. रवि कुमार चौरसिया, डॉ अविनाश तिवारी, डॉ. विपिन कुमार सिंह ने दिया। इस अवसर पर महाविद्यालय के डिफेंस विभाग के अध्यक्ष डॉ. जगदीश प्रसाद वर्मा, डॉ. संतलाल, डॉ. संतोष कुमार सरोज, डॉ. लवलेश मिश्रा आदि उपस्थित रहे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान रोड सेफ्टी क्लब छात्र प्रभारी सुमित सिंह ने दिया।
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