-अधिवक्ता प्रवीण दुबे के आरोपों ने खोला अयोध्या का ‘माइनिंग माफिया मॉडलÓ
अयोध्या 2 दिसंबर (आरएनएस)। सरयू तट का बालू कारोबार अब महज़ खनन का धंधा नहीं, बल्कि सत्ता-संरक्षण और संगठित अपराध की मज़बूत कड़ी बन चुका है। यह दावा अधिवक्ता प्रवीण दुबे द्वारा की गई प्रेस वार्ता में किया। दुबे के अनुसार बालू चोरी की आड़ में ऐसा ‘खनन सिंडिकेटÓ फल-फूल रहा है, जो पट्टों के नाम पर करोड़ों की लूट, अवैध मशीनरी संचालन और प्रशासनिक तंत्र को चुनौती देने की क्षमता रखता है।
फतेहपुर सरिया माझा के गाटा संख्या 13 का पट्टा भले संतोष जायसवाल के नाम दर्ज हो, पर दुबे का कहना है कि सरयू की उपधारा पर दिन-रात 5-6 पोकलैंड मशीनें अवैध रूप से चल रही हैं। वीडियो, फोटो और अन्य प्रमाण प्रशासन को सौंपे गए, लेकिन कार्रवाई के नाम पर शून्य जैसी स्थिति बनी रही। दुबे ने दावा किया यह केवल खनन नहीं, सरकारी सिस्टम को धता बताकर की जा रही प्रत्यक्ष लूट है।
29 नवंबर को एआरओ अन्नत सिंह पर हुए हमले को दुबे ने सिंडिकेट की खुली चेतावनी बताया। हाईवे पर कई गाडिय़ों का पीछा, रास्ता रोकने की कोशिश और खुलेआम धमकी इन घटनाओं ने जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुबे के शब्दों में अयोध्या में कानून अब सड़क पर नहीं, बल्कि बल और संरक्षण पर चलता दिख रहा है। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि खनन माफिया राकेश व सरोज जायसवाल का दुस्साहस इतना बढ़ चुका है कि पुलिस थाने की भी परवाह नहीं रह गई।उनके अनुसार कैंट थाना परिसर में 60दृ70 लोग घुस आए, और खनन अधिकारियों से अभद्रता और धक्का-मुक्की की। कई अधिकारियों को कमरे में छिपकर अपनी जान बचानी पड़ी, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। दुबे ने सवाल उठाया-जब थाना सुरक्षित नहीं, तो अधिकारी कहाँ जाएँ
दुबे ने बताया कि वर्ष 2020 में उनकी ही याचिका पर हाईकोर्ट ने मांझा बरेठा के अवैध खनन मामले में 1.35 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके बावजूद न तो खनन रुका, न ही सिंडिकेट की शक्ति कम हुई। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि यह गिरोह राजनीतिक संरक्षण के सहारे ही पनपता है। सरकार कोई भी हो, माफिया अपना रंग बदलकर सत्ता की छांव पा लेता है। उनके अनुसार-जब कार्रवाई आधी-अधूरी रह जाती है, तो माफिया और ताकतवर होकर उभरता है। दुबे ने मुख्यमंत्री, डीएम, एसएसपी, स्थानीय सांसद व पूर्व सांसद से इस पूरे खनन माफिया नेटवर्क पर तत्काल निर्णायक कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है यह लड़ाई बालू की नहीं, प्रशासन की साख बचाने की है। थाने में घुसकर अधिकारी घेर लिए जाएँ, यह अवैध खनन नहीं शासन को खुली चुनौती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की घटनाएँ प्रदेश की ईमानदार सरकार की छवि धूमिल कर रही हैं।अयोध्या मॉडल चर्चा में धीरे-धीरे यह मामला सिर्फ खनन का नहीं, सत्ता, संरक्षण और सिस्टम की कमजोरियों का आईना बनता जा रहा है।
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