नईदिल्ली,04 दिसंबर। कमोडिटी फ्यूचर्स मार्केट में गुरुवार को सोना और चांदी की कीमतों में अचानक गिरावट देखने को मिली. आज सुबह दोनों कीमती धातुओं की कीमतें धड़ाम हो गईं. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह निवेशकों की तरफ से मुनाफावसूली और अमेरिकी डॉलर में मजबूती है. डॉलर एक बार फिर 99 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि इससे पहले डॉलर इंडेक्स 98.85 पर फिसल चुका था. डॉलर में मजबूती के कारण सोना और चांदी की डिमांड कमजोर हो गई है.
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर गुरुवार को फरवरी की कॉन्ट्रैक्ट डिलीवरी वाला सोना 0.13 प्रतिशत गिरकर ?1,30,288 प्रति 10 ग्राम पर आ गया. वहीं, मार्च डिलीवरी वाली चांदी 0.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ ?1,82,200 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी. बाजार में निवेशक फिलहाल नीतिगत फैसलों और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के कारण सतर्क दिखाई दे रहे हैं.
इस सप्ताह निवेशकों की निगाहें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के आगामी फैसले पर टिकी हैं. शुक्रवार को एमपीसी अपनी बैठक में नीतिगत दरों पर बड़ा निर्णय लेने वाली है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आरबीआई रेपो रेट में कटौती करता है, तो होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन की ईएमआई कम हो सकती है. इस निर्णय का असर शेयर बाजार, सोना और चांदी दोनों पर दिखाई दे सकता है.
सोना और चांदी के निवेशक अगले सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओपन मार्केट कमेटी की बैठक के नतीजों पर भी नजर रख रहे हैं. यह बैठक 9 और 10 दिसंबर को होने वाली है, जिसमें ब्याज दरों में कटौती की संभावना जताई जा रही है. रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सीएमई फेडवॉच टूल से पता चलता है कि ब्याज दरों में कटौती की संभावना 89 प्रतिशत है. अगर फेड दर में कटौती करता है तो इससे सोने और चांदी की कीमतों को मजबूती मिल सकती है.
विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर की मजबूती और निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते सोना-चांदी की कीमतों में अस्थिरता बनी रहेगी. वहीं, आरबीआई और फेड की आगामी नीतिगत बैठकों से बाजार की दिशा तय हो सकती है. निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है.
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