मुंबई,04 दिसंबर। गुरुवार को फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है. इससे पहले यह अनुमान 6.9 प्रतिशत था. फिच ने अपने आर्थिक विश्लेषण में कहा कि उपभोक्ता खर्च में तेजी, व्यावसायिक माहौल में सुधार और हाल ही में लागू किए गए जीएसटी सुधारों से अर्थव्यवस्था की गति तेज हुई है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही, जो अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत थी. हालांकि, फिच का अनुमान है कि मार्च 2026 के अंत तक वृद्धि दर थोड़ी धीमी रह सकती है. बावजूद इसके, पूरे वर्ष के लिए एजेंसी ने अपनी वृद्धि दर का अनुमान 7.4 प्रतिशत पर रखा है.
फिच के अनुसार, निजी उपभोक्ता खर्च इस वित्त वर्ष की वृद्धि का मुख्य स्तंभ है. इसे मजबूत वास्तविक आय, उपभोक्ता विश्वास में बढ़ोतरी और जीएसटी सुधारों से समर्थन मिला है. अक्तूबर में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति 0.3 प्रतिशत के सर्वकालिक निम्न स्तर पर आ गई, जिसका मुख्य कारण खाद्य और पेय पदार्थों की कम कीमतें रही.
एजेंसी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. फिच ने कहा कि वित्तीय स्थिति में नरमी आने पर अगले वर्ष की दूसरी छमाही में निजी निवेश में तेजी आ सकती है.
मुद्रास्फीति में कमी के कारण फिच का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक दिसंबर में नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर इसे 5.25 प्रतिशत तक ले जा सकता है. साल 2025 में अब तक कुल 100 आधार अंकों की कटौती हो चुकी है, साथ ही नकद आरक्षित अनुपात में भी कई बार कमी की गई है.
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति शुक्रवार को अपनी नीति समीक्षा की घोषणा करेगी. फिच ने कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति में सुधार और आर्थिक गतिविधियों के मजबूत बने रहने के कारण, केंद्रीय बैंक ने अपने सहजता चक्र के अंत तक पहुंच गया है और अगले दो वर्षों तक ब्याज दरें 5.25 प्रतिशत पर बनी रह सकती हैं.
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