0 स्कूल गोइंग बच्चे डिजीटल दुनिया से निकलकर खेल मैदान पहुंचे
रायपुर, 04 दिसंबर (आरएनएस)। किशोरवय के स्कूल गोइंग बच्चों में मायोपिया की समस्या (निकट दृष्टि दोष) लगातार बढ़ रही है। डिजीटल दुनिया मोबाइल, लेपटॉप आदि का प्रयोग कम उम्र के बच्चों की आंखों के लिए घातक सिद्ध हो रहा है।
बच्चों के माता-पिता एवं स्कूल के शिक्षकों से मोबाइल में होमवर्क न देने की अपील एवं नाबालिगों को मोबाइल न देने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य नेत्र विशेषज्ञों की समिति द्वारा जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उक्त जानकारी प्रेसक्लब रायपुर में आयोजित पत्रकारवार्ता में संस्था के अध्यक्ष डॉ. मनीष श्रीवास्तव, डॉ. हर्ष वर्धन गुप्ता एवं अन्य नेत्र चिकित्सकों ने संयुक्त रूप से दी।
पत्रकारवार्ता में डॉ. मनीष ने बताया कि कम उम्र के बच्चों का अधिकांश समय इन दिनों लेपटाप, कम्प्यूटर एवं मोबाइल टीवी देखने में बित रहा है जिसकी वजह से जहां उनमें मोटापे की समस्या आ रही है। वहीं आठवीं से दसवीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते 80 प्रतिशत विद्यार्थियों को चश्मा लग जाता है। स्कूल के शिक्षकों को बच्चों को डिजीटल दुनिया से निकालकर खेल मैदान तक पहुंंचाने की जिम्मेदारी है। जिस तरह से मां बाप खुलेआम बच्चों को मोबाइल दे रहे हैं वह उनकी आंखों के लिए नुकसान दायक है। पत्रकारवार्ता में डॉ. मनीष एवं हर्ष वर्धन ने जानकारी देते हुए बताया कि डिजीटल आई स्टेज से लड़ें। बाहर का समय भविष्य की दृष्टि का कवच है। आंखों के लिए सुपर फुड्स का इस्तेमाल करें, स्वच्छता एवं सुरक्षा लेंस आंखों को संरक्षित करने का सर्वाेत्तम उपाय है। आंखों की नियमित जांच कराएं।
संदीप शर्मा
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