मुंबई,05 दिसंबर। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) ने शुक्रवार को रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत पर ला दिया. इस फैसले का असर बाजार पर तुरंत दिखा, खासकर रेट-सेंसिटिव सेक्टरों में. रियल एस्टेट, बैंकिंग और ऑटो कंपनियों के शेयर तेजी से बढ़े.
रेपो दर में कमी के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में सबसे अधिक तेजी देखी गई. प्रेस्टीज, डीएलएफ और ओबेरॉय रियल्टी के शेयर 2 प्रतिशत तक बढ़ गए. ब्याज दर में कटौती से होम लोन सस्ता होता है, जिससे घरों की खरीद में बढ़ोतरी होती है और रियल एस्टेट कंपनियों की मांग मजबूत होती है.
बैंकिंग सेक्टर में भी आरबीआई के इस फैसले का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला. एसबीआई, पीएनबी और इंडियन बैंक के शेयर 2 प्रतिशत तक ऊपर गए. रेपो रेट में कटौती से बैंकों के लिए कर्ज की मांग बढ़ती है और अर्थव्यवस्था की स्थिति पर सकारात्मक असर पड़ता है. इससे बैंकिंग शेयरों में व्यापक खरीदारी देखने को मिली.
ऑटो सेक्टर पर भी रेपो दर में कमी का सीधा असर पड़ा. वाहन लोन सस्ता होने से ग्राहकों की खरीद क्षमता बढ़ती है. शुक्रवार को मारुति सुजुकी, आयशर मोटर्स और एमएंडएम के शेयर 1 प्रतिशत तक मजबूत हुए. यह घरेलू मांग में सुधार और उपभोक्ता विश्वास बढऩे का संकेत है.
आरबीआई ने फरवरी, अप्रैल और जून में इस वर्ष रेपो दर में कुल 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुकी है. अगस्त और अक्टूबर की बैठक में दरें स्थिर रखी गई थीं. एमपीसी ने इस बार भी नीति रुख को तटस्थ बनाए रखा है, जिसका मतलब है कि आगे की नीतियां आर्थिक डेटा के आधार पर तय की जाएंगी.
बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करने के लिए आरबीआई ने ?1 लाख करोड़ के खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) की घोषणा की. ओएमओ के तहत आरबीआई बाजार में सरकारी बॉन्ड खरीद या बेचकर लिक्विडिटी नियंत्रित करता है. रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती से बाजार में नई ऊर्जा देखने को मिली है. रियल एस्टेट, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में मांग बढऩे की उम्मीद है, जबकि व्यापक बाजार आरबीआई की लिक्विडिटी नीति पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहा है.
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