लखनऊ 5 दिसंबर (आरएनएस )बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर 06 दिसम्बर 2025 को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में समाजवादी बाबा साहेब अम्बेडकर वाहिनी द्वारा प्रस्तावित विशाल श्रद्धांजलि सभा की सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद अचानक अनुमति रद्द किए जाने को समाजवादी पार्टी ने अलोकतांत्रिक कदम और बाबा साहेब के प्रति दुर्भावनापूर्ण व्यवहार करार दिया है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के दबाव में पुलिस-प्रशासन ने यह फैसला लिया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता को सांसद आर के चौधरी, पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल और समाजवादी बाबा साहब अम्बेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिठाई लाल भारती ने संबोधित किया। वक्ताओं ने बताया कि श्रद्धांजलि सभा में मुख्य अतिथि के रूप में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की उपस्थिति तय थी, लेकिन कार्यक्रम से महज पहले भाजपा सरकार ने प्रशासनिक दबाव डालकर अनुमति निरस्त करा दी।वक्ताओं ने कहा कि यह कदम सरकार की तानाशाही मानसिकता और बाबा साहेब के प्रति उसकी दोहरे चरित्र वाली राजनीति को उजागर करता है। भाजपा केवल वोट के लिए बाबा साहेब का नाम लेती है, जबकि असल में वह दलित समाज की उभरती राजनीतिक चेतना को रोकना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्रद्धांजलि सभा को रोककर भाजपा ने यह साबित किया है कि वह संविधान निर्माता और उनके विचारों से नफरत करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संविधान और आरक्षण दोनों को समाप्त करने की दिशा में बढ़ रही है और यह दलित समाज के लिए गंभीर खतरा है।सपा नेताओं ने कहा कि उनकी सभा किसी धरना-प्रदर्शन या राजनीतिक उग्रता का कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि बाबा साहेब के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने का शांतिपूर्ण आयोजन था। इसके बावजूद सरकार ने अनुमति को रद्द किया, जिससे यह साफ हो जाता है कि उसे संविधान और समतामूलक समाज के विचार से परेशानी है। आरएसएस की विचारधारा पर भी निशाना साधते हुए नेताओं ने कहा कि जब बाबा साहेब ने संविधान का प्रारूप तैयार किया था, तब आरएसएस के तत्कालीन सरसंघचालक गोलवलकर ने समता आधारित समाज की अवधारणा की आलोचना की थी। यह विचार आज भी भाजपा-आरएसएस में विद्यमान है।नेताओं ने कहा कि दलित समाज अब जागरूक है, शिक्षित है और अपने अधिकारों के लिए झुकने को तैयार नहीं। समाजवादी पार्टी का नारा है— बाबा साहेब का मिशन अधूरा, अखिलेश यादव करेंगे पूरा। उन्होंने कहा कि संविधान गरीबों, वंचितों और पिछड़ों का सबसे बड़ा हथियार है और समाजवादी पार्टी उसकी रक्षा के लिए हर मोर्चे पर संघर्ष करेगी। भाजपा लोकतंत्र के मंदिर में राजतंत्र का प्रतीक सेंगाल रखकर समाज को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है, लेकिन हम गांव-गलियों तक जाकर भाजपा की नीतियों का सच उजागर करेंगे।इस दौरान मंच से प्रदर्शित श्वेत-श्याम पोस्टरों में ‘परमिशन रोको, कार्यक्रम रोको, पर दलितों की जागृति कैसे रोकोÓ और ‘श्रद्धांजलि सभा रद्द करने का विरोधÓ जैसे संदेश दर्ज थे। सभा स्थल की अनुमति रद्द किए जाने के विरोध में कार्यकर्ताओं ने बाबा साहेब अमर रहें और अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे भी लगाए।कार्यक्रम में गौरव रावत विधायक, लोटन राम निषाद, मनोज पासवान, सत्य प्रकाश सोनकर, राकेश रंजन, महावीर सिंह जाटव, सत्येन्द्र कुमार पानू, सचिन वर्मा कोरी, डॉ. रघुवीर चौधरी, राम बाबू सुदर्शन भारती, इं. राममूर्ति चौरसिया, लालचन्द्र गौतम, संजय साहू, रमेश बागी, विजय पासवान सहित अनेक प्रमुख नेता मौजूद रहे।
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