लखनऊ ,13 दिसंबर (आरएनएस)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हैदराबाद में आयोजित विजन इंडिया एआई समिट को संबोधित करते हुए कहा कि यदि भारत को वास्तव में विकसित देश बनाना है तो डेमोग्राफिक डिविडेंड से जुड़ी चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि युवाओं की बड़ी आबादी को अवसर में बदलने के लिए मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करना और रोजगारोन्मुख नीतियां बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। देश की सबसे बड़ी चुनौती गरीबी है और नौजवानों को नौकरी तथा रोजगार कैसे मिले, इसके लिए ठोस कार्यक्रम और योजनाएं बनानी होंगी।
अखिलेश यादव ने कहा कि आज भी भारत की लगभग 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। ऐसे में यह एक बड़ी चुनौती है कि ग्रामीण आबादी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक से कैसे जोड़ा जाए और तकनीक का वास्तविक लाभ गांवों तक कैसे पहुंचे। उन्होंने कहा कि संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है और सरकारों को इस दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए। आज डाटा सेंटर की चर्चा हो रही है, लेकिन यह भी जरूरी है कि डाटा सेंटर के लिए ऐसी नीतियां बनें जिससे सबका साथ और सबका विकास एक साथ संभव हो सके।उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षा को लेकर गहरा भेदभाव मौजूद है, जिसे दूर करने की आवश्यकता है। इस बात पर भी विचार होना चाहिए कि स्वास्थ्य, कृषि और तेजी से बढ़ रहे शहरीकरण के क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का किस तरह से उपयोग किया जाए, ताकि आम लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव आ सके। अखिलेश यादव ने कहा कि डिजिटल डिवाइड को कम करने के लिए समाजवादी पार्टी ने अपने कार्यकाल में बड़े पैमाने पर काम किया। उत्तर प्रदेश में लाखों छात्र-छात्राओं को लैपटॉप वितरित किए गए और एचसीएल जैसी बड़ी आईटी कंपनी को प्रदेश में लाकर आधारभूत ढांचा और नीतिगत सहयोग दिया गया।समिट में मौजूद विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि यहां से जो भी सुझाव सामने आएंगे, उन्हें भविष्य के कार्यक्रमों और नीतियों में शामिल किया जाएगा। सुपर सेशन के सवाल-जवाब के दौरान उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को एआई से जोडऩे में सफलता मिलती है तो देश में बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।अखिलेश यादव ने हैदराबाद और उत्तर प्रदेश के अनुभव साझा करते हुए कहा कि देश में सबसे पहले 108 एंबुलेंस सेवा हैदराबाद में शुरू हुई थी। प्रोफेसर वेंकट के सहयोग से उत्तर प्रदेश में 108 एंबुलेंस योजना की शुरुआत की गई। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और घनी आबादी वाले राज्य में 108 एंबुलेंस का मजबूत ढांचा तैयार किया गया। इसके साथ ही डायल 100 पुलिस रिस्पांस सिस्टम विकसित किया गया। प्रोफेसर वेंकट यूपी के अधिकारियों को न्यूयॉर्क लेकर गए, जहां न्यूयॉर्क पुलिस की कार्यप्रणाली को समझकर उसी के अनुरूप यूपी में डायल 100 का ढांचा तैयार किया गया। डेटा और तकनीक के साथ इतना बड़ा पुलिस रिस्पांस सिस्टम बहुत कम जगहों पर देखने को मिलता है।उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसा एआई सिस्टम विकसित करना होगा, जिससे उसका बेहतर उपयोग हो और दुरुपयोग न हो। यह एक बड़ी चुनौती है। कृषि क्षेत्र में एआई किसानों और खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा योगदान दे सकता है। ड्रोन तकनीक और सैटेलाइट इमेजरी का सही उपयोग हो तो किसानों को बड़ा लाभ मिल सकता है और उनकी चुनौतियां कम हो सकती हैं। यदि डिसीजन सपोर्ट सिस्टम विकसित हो जाए तो खेती से जुड़े फैसलों में किसानों को बड़ा फायदा होगा। ओलावृष्टि, बाढ़, सूखा जैसी आपदाओं की जानकारी पहले से मिल जाए तो किसान समय रहते तैयारी कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि मंडियों को भी डेटा से जोडऩे की जरूरत है, ताकि यह जानकारी उपलब्ध हो कि कौन किसान कौन सी फसल ला रहा है और खरीदार कौन है। इससे किसान का समय बचेगा और उसे बेहतर समर्थन मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। संसाधनों की कमी और समय पर बीमारी की पहचान न हो पाने की समस्या बनी रहती है। ऐसे में एआई और टेलीमेडिसिन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एआई आधारित टेलीमेडिसिन के जरिए इलाज संभव हो सकता है।अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में तेजी से शहरीकरण हो रहा है और शहरों का बेहतर होना जरूरी है, तभी लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा। उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे का मजबूत ढांचा दिया गया, लेकिन अन्य जगहों पर टोल प्लाजा पर आज भी लोगों का समय बर्बाद होता है। यातायात और बिजली जैसे क्षेत्रों में एआई का प्रयोग कर स्मार्ट टोल और स्मार्ट सिस्टम विकसित किए जाने चाहिए, जिससे लोगों को रुकना न पड़े। शहरों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और वेस्ट कलेक्शन में एआई के उपयोग से बड़ा सुधार हो सकता है। इलेक्ट्रॉनिक कचरा तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके निस्तारण की कोई ठोस नीति नहीं है, जो एक गंभीर समस्या है।उन्होंने कहा कि शहरों में यातायात सुधारने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करना होगा। तकनीक के जरिए भीड़भाड़ वाले इलाकों की पहचान कर समाधान निकाला जा सकता है। शहरों के समग्र विकास में एआई बड़ी भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने चिंता जताई कि उत्तर प्रदेश में ऑनलाइन स्कैम और साइबर फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं। एआई जनरेटेड वीडियो, डीप फेक और फर्जी कंटेंट के जरिए लोगों को गुमराह किया जा रहा है। चुनाव के समय राजनीतिक दलों और नेताओं को नुकसान पहुंचाने के लिए भी एआई का दुरुपयोग किया जा सकता है।अखिलेश यादव ने कहा कि एआई का उपयोग सकारात्मक होना चाहिए, लोगों को जोडऩे वाला होना चाहिए। अभी एआई विकसित तो हो रहा है, लेकिन उसका रेगुलेशन नहीं हुआ है। देश में एआई अभी शुरुआती दौर में है और इसके लिए स्पष्ट नीति और नियमन जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब भी नई तकनीक आती है तो यह बहस शुरू हो जाती है कि नौकरियां खत्म हो जाएंगी। कंप्यूटर के समय भी यही चर्चा हुई थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आज तकनीक के क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार पैदा हो रहे हैं। नई तकनीक से नौकरियां कम नहीं होंगी, बल्कि युवाओं को नए कौशल के साथ तैयार करना होगा।उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से पुलिसिंग में सुधार, अपराध की जांच में तेजी और साइबर क्राइम की पहचान संभव है। हैदराबाद में आयोजित विजन इंडिया एआई समिट में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ-साथ आलोक रंजन पूर्व मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश, राजीव राय सांसद और अभिषेक मिश्र पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश भी उपस्थित रहे।
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