लखनऊ ,13 दिसंबर (आरएनएस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी विजन का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज देश के प्रमुख स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में तेजी से अपनी सशक्त पहचान बना रहा है। इस परिवर्तन में देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में शामिल आईआईटी कानपुर की भूमिका बेहद अहम हो गई है। आईआईटी कानपुर अब केवल उच्च शिक्षा और शोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश के आर्थिक भविष्य को दिशा देने वाला एक मजबूत स्टार्टअप हब बनकर उभर चुका है। यहां स्थित स्टार्टअप इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर में इस समय 521 स्टार्टअप सक्रिय हैं, जो नवाचार के माध्यम से न केवल अपनी पहचान बना रहे हैं, बल्कि देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर भी पैदा कर रहे हैं। इन प्रयासों के जरिए उत्तर प्रदेश को नवाचार की नई राजधानी के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस काम हो रहा है।आईआईटी कानपुर के औद्योगिक एवं प्रबंधन इंजीनियरिंग विभाग, डिजाइन प्रोग्राम और स्टार्टअप इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर के प्रभारी प्रोफेसर दीपू फिलिप का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार स्टार्टअप को लेकर व्यापक स्तर पर काम कर रही है। सरकार की नीतियों, संसाधनों और सहयोग का ही असर है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप के बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा। उनके अनुसार प्रदेश सरकार की स्टार्टअप फ्रेंडली नीतियां, आसान फंडिंग व्यवस्था और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ने आईआईटी कानपुर के इनोवेशन इकोसिस्टम को नई गति दी है। सरकार और संस्थान की यह साझेदारी ऐसे प्लेटफॉर्म का निर्माण कर रही है, जहां विचार सीधे उद्योग और बाजार से जुड़कर व्यावहारिक रूप ले रहे हैं।आईआईटी कानपुर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल स्टार्टअप को स्थान और संसाधन ही उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि स्वयं मेंटर की भूमिका निभाता है। यहां हर स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए एक फैकल्टी मेंबर को मेंटर के रूप में जोड़ा जाता है। स्टार्टअप को तकनीकी मार्गदर्शन से लेकर बिजनेस मॉडलिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, मार्केट एक्सेस और निवेशकों से जोडऩे तक का पूरा इकोसिस्टम एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराया जाता है। इसी कारण यहां से निकलने वाले स्टार्टअप शुरुआती चरण में ही मजबूत आधार के साथ आगे बढ़ते हैं और बाजार में टिकाऊ पहचान बना पाते हैं।आईआईटी कानपुर के इनक्यूबेशन सेंटर में विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग और उत्पादन से जुड़े स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जा रहा है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस प्रोडक्शन, ड्रोन, एग्री टेक, क्लीन एनर्जी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बड़े व्यवसाय में बदला जा रहा है। यहां विकसित हो रहे कई स्टार्टअप हजारों करोड़ रुपये के बाजार को लक्ष्य बना चुके हैं और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में योगदान दे रहे हैं। आईआईटी कानपुर परिसर में स्थित ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े स्टार्टअप द्वारा निर्मित ड्रोन का उपयोग ऑपरेशन सिंदूर में किया जाना इस क्षमता का प्रमाण है। कोविड-19 के दौरान भी यहां के स्टार्टअप ने तकनीकी समाधान देकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।आईआईटी कानपुर का इनक्यूबेशन सेंटर किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। देश के किसी भी हिस्से से आने वाला स्टार्टअप यहां आवेदन कर सकता है। चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से आइडिया की गुणवत्ता, तकनीकी क्षमता और बिजनेस संभावनाओं पर आधारित होती है। यही कारण है कि आईआईटी कानपुर का स्टार्टअप नेटवर्क आज राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है, लेकिन इसका सबसे बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश को मिल रहा है। योगी सरकार के सहयोग और आईआईटी कानपुर के नवाचार के संगम से प्रदेश तेजी से देश के स्टार्टअप मैप पर अग्रणी स्थान की ओर बढ़ रहा है।
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