नई दिल्ली , 19 दिसंबर (आरएनएस)। आजकल आनुवंशिक रूप से परिवर्तित मक्का (GM) एक बार फिर से राष्ट्रीय अख़बारों की सुर्खियों में है। अगर हम ताजा घटनाक्रमों पर नजर डालें तो मक्का के आयात को लेकर लगातार गहमागहमी जारी है। भारत में इसे अमेरिका व्यापार डील, महत्वाकांक्षी एथेनॉल मिश्रण लक्ष्यों, बीज विनियमन से जुड़ी चर्चाओं तथा किसानों की आय और इसकी घरेलू खरीद से जुड़ी चिंताओं से जोड़ा जा रहा है। आज मक्का अब केवल कृषि फसल नहीं बल्कि भारत के आर्थिक और नीतिगत विकल्पों का एक महत्वपूर्ण प्रश्न बन चुका है। अगर हम अलग अलग देखे तो व्यापार वार्ता, एथेनॉल नीति या मक्के की कीमतों से जुड़ी खबरें हमें सामान्य लग सकती हैं। लेकिन जब इन्हें एक साथ देखा जाए, तो साफ़ संकेत है कि जीएम मक्का के समर्थकों के द्वारा भारत की लंबे समय से चली आ रही नॉन जीएम मक्का नीति पर पुनर्विचार का दबाव लगातार बढ़ रहा है। हालांकि अभी तक किसी औपचारिक नीति परिवर्तन की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बातचीत और नीति विमर्श की भाषा पहले अधिक लचीली होती जा रही है। चूंकि अमेरिका में उत्पादित अधिकांशतः मक्का आनुवंशिक रूप से परिवर्तित है, इसलिए भारतीय बाजार में इसका किसी भी प्रकार का प्रवेश गंभीर प्रभाव डाल सकता है। भारत के सामने प्रश्न केवल तकनीकी नहीं है। यह नैतिक, आर्थिक और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह खाद्य सुरक्षा, किसान की मेहनत, ग्रामीण आजीविका और भारत के अपने कृषि मार्ग को चुनने के संप्रभु अधिकार से संबंधित है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भले ही मक्का एक कमोडिटी हो लेकिन हमारे देश में ये आजीविका का साधन है। एथेनॉल मिश्रण को लेकर हालिया चर्चाओं ने इस बहस को और तेज कर दिया है। एथेनॉल मिश्रण के उच्च लक्ष्यों की प्राप्ति को ऊर्जा नीति की सफलता के रूप में देखा गया है। जैसे जैसे मक्का को एथेनॉल के लिए एक संभावित कच्चे माल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, कुछ लोग आयात को पूरक विकल्प के रूप में देखने लगे हैं। इन सुझावों को अत्यंत सावधानी से परखने की आवश्यकता है। एथेनॉल नीति का उद्देश्य घरेलू कृषि को मजबूत करना होना चाहिए, न कि अनजाने में उसे कमजोर करना। भारत ने आनुवंशिक रूप से परिवर्तित फसलों, विशेष रूप से मक्का, पर नियामक सुरक्षा उपाय बनाए रखे हैं। आज भी यहाँ जीएम मक्का के आयात पर प्रतिबंध है और किसी भी स्वीकृति के लिए कठोर नियामक प्रक्रिया अनिवार्य है। यह नीति जैव सुरक्षा और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देती है, साथ ही घरेलू उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों को भी प्रोत्साहित करती है।
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