रायपुर, 22 दिसंबर (आरएनएस)। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई), रायपुर ने फर्जी जीएसटी फ र्मों के जरिए करोड़ों रुपये के टैक्स फ्र ॉड का बड़ा खुलासा किया है। मामले में पुलिस ने अमन कुमार अग्रवाल और विक्रम मंधानी को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों पर संगठित तरीके से फर्जी कंपनियों का नेटवर्क बनाकर बिना किसी वास्तविक वस्तु या सेवा की आपूर्ति के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पास करने का गंभीर आरोप है। इस मामले को अब तक के बड़े जीएसटी फर्जीवाड़ों में से एक माना जा रहा है।
डीजीजीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई 19 दिसंबर 2025 को रायपुर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र मैग्नेटो मॉल में स्थित मेसर्स प्रेम एंटरप्राइजेज में की गई तलाशी के बाद सामने आई। तलाशी के दौरान अधिकारियों को बड़ी संख्या में फर्जी कंपनियों, कागजी लेन-देन और डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े अहम दस्तावेज मिले, जिनसे इस पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं। फर्जी फर्मों का संगठित रैकेट जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने दर्जनों फर्जी जीएसटी पंजीकृत फर्मों का निर्माण कर एक संगठित नेटवर्क तैयार किया था। इन फर्मों के नाम पर केवल कागजी इनवॉइस जारी किए जा रहे थे, जबकि वास्तव में किसी भी प्रकार का व्यापार या वस्तुओं की आपूर्ति नहीं की जा रही थी। इन फर्जी इनवॉइस के माध्यम से आईटीसी पास कर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया। तलाशी के दौरान आरोपियों के परिसर से करीब 20 सिम कार्ड बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराने और विभिन्न फर्मों के नाम से संपर्क विवरण दर्ज करने में किया गया था। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि इन फर्जी फर्मों से जुड़े अधिकांश ई-मेल आईडी विक्रम मंधानी द्वारा स्वयं संचालित किए जा रहे थे, जिससे पूरे नेटवर्क के संचालन में उसकी केंद्रीय भूमिका सामने आई है।
डीजीजीआई अधिकारियों को विक्रम मंधानी के कब्जे से 50 से अधिक फर्जी फर्मों के जीएसटी लॉगिन-आईडी और पासवर्ड भी मिले हैं। इन फर्मों के जरिए बड़े पैमाने पर फर्जी इनवॉइस जारी किए गए और आईटीसी का दुरुपयोग किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल शुरुआती आंकड़े हैं और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, नेटवर्क से जुड़ी और भी फर्मों के सामने आने की संभावना है। प्रारंभिक डेटा विश्लेषण में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इन फर्जी फर्मों के माध्यम से लगभग 48 करोड़ रुपये मूल्य के इनवॉइस जारी किए गए, जिनमें करीब 9 करोड़ रुपये का जीएसटी शामिल है। डीजीजीआई अधिकारियों के अनुसार, यह राशि शुरुआती आकलन पर आधारित है और विस्तृत जांच के बाद टैक्स चोरी की कुल रकम इससे कहीं अधिक हो सकती है।
डीजीजीआई रायपुर ने दोनों आरोपियों को 20 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया। इसके बाद 21 दिसंबर 2025 को उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने अमन कुमार अग्रवाल और विक्रम मंधानी को 2 जनवरी 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि मामले में डिजिटल साक्ष्य, बैंक खातों और अन्य संदिग्ध लेन-देन की गहन जांच की जानी बाकी है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि अमन कुमार अग्रवाल आदतन अपराधी है। इससे पहले उसे छत्तीसगढ़ राज्य जीएसटी विभाग द्वारा 10 जून 2025 को भी इसी तरह के जीएसटी फर्जीवाड़े के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके बावजूद उसने दोबारा फर्जी फर्मों का नेटवर्क खड़ा कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया।
डीजीजीआई अधिकारियों का कहना है कि यह एक सुनियोजित और संगठित जीएसटी फ्रॉड नेटवर्क है, जिसकी कडिय़ां छत्तीसगढ़ के बाहर अन्य राज्यों तक भी फैली हो सकती हैं। मामले में बैंक खातों की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, डिजिटल डिवाइस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि जीएसटी प्रणाली के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे तत्वों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत कठोर दंड दिलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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