रुड़की,26 दिसंबर (आरएनएस)। क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गेहूं, सरसों, गन्ना और चारे की फसलों पर जंगली सूअर, नीलगाय, बंदर और अन्य जानवरों के झुंड हमला कर रहे हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। माजरी, तेल्लीवाला, तांशीपुर, माधोपुर, इकबालपुर, झबरेड़ा समेत आसपास के कई गांवों में खेतों की फसलें रातों-रात बर्बाद हो रही हैं। किसान दिन-रात खेतों की रखवाली को मजबूर हैं, फिर भी नुकसान थमने का नाम नहीं ले रहा। जिले में इस समय करीब 5600 हजार हेक्टेयर भूमि पर मुख्य फसलें उगाई जा रही है। इस समय करीब 4200 क्षेत्र के किसान धीर सिंह, मनीष सैनी, रामपाल, सुखपाल सैनी, मोंटी राणा, पवन कश्यप आदि का कहना है कि रबी सीजन की यह फसलें उनकी साल भर की मेहनत का आधार होती हैं। गेहूं और सरसों पर फल आने वाला है। जबकि गन्ने और चारे की फसलें भी कटाई के करीब हैं। ऐसे में जंगली जानवरों के झुंड खेतों में घुसकर फसलें रौंद रहे हैं और खा रहे हैं। कई किसानों ने खेतों के चारों ओर तारबंदी और अस्थायी उपाय किए, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन क्षेत्रों के पास बसे गांवों में समस्या अधिक गंभीर है, लेकिन अब यह खतरा अंदरूनी गांवों तक फैल चुका है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जंगली जानवरों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए ठोस योजना बनाई जाए, गश्त बढ़ाई जाए और प्रभावित इलाकों में सुरक्षा उपाय किए जाएं। यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जाएगी।
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