ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे
अखंड नगर/सुल्तानपुर 30 दिसंबर (आरएनएस)। तुलसी नगर रेलवे स्टेशन पर करोड़ों रुपये खर्च कर आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिनमें उन्नत प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और फ्लाई ओवर शामिल हैं। इन सुविधाओं के बावजूद, स्टेशन पर एक भी यात्री ट्रेन नहीं रुकती है। इसके कारण यात्रियों की संख्या शून्य है और टिकटों की बिक्री भी नहीं होती। इस स्थिति के विरोध में ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। स्टेशन पर पर्याप्त कर्मचारी भी तैनात हैं, जिन्हें नियमित रूप से वेतन दिया जा रहा है। यह स्थिति सार्वजनिक धन के अप्रभावी उपयोग का स्पष्ट उदाहरण है। जब स्टेशन पर कोई ट्रेन नहीं रुकती, तो इन सुविधाओं का उपयोग कौन कर रहा है। टिकट बिक्री शून्य होने से राजस्व सृजन का कोई आधार नहीं है। करोड़ों रुपये के इस व्यय का उद्देश्य अब एक बड़ा प्रश्नचिह्न बन गया है। इस नीतिगत विफलता का सामाजिक प्रभाव गंभीर है। लगभग 30-35 गांवों की आबादी को आज भी इलाज, शिक्षा और रोजगार के लिए 10-15 किलोमीटर दूर अन्य स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता है। ग्रामीणों का मानना है कि यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 19 (आवागमन की स्वतंत्रता) और 21 (गरिमापूर्ण जीवन) की भावना के प्रतिकूल है। स्थानीय निवासी अजय सिंह ने बताया कि यह स्टेशन आजमगढ़, जौनपुर, सुल्तानपुर और अंबेडकर नगर जैसे चार जिलों को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्टेशन बनाकर अच्छा काम किया है, लेकिन लगभग 10 साल से यहां ट्रेनें नहीं रुक रही हैं। इसी कारण ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन शुरू किया है और मांगें पूरी न होने पर अनिश्चितकालीन धरना जारी रखने की चेतावनी दी है। डीआरएम और एआरएम स्तर पर संवाद की कमी तथा जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी इस मुद्दे पर जवाबदेही के अभाव को उजागर करती है। तुलसी नगर रेलवे स्टेशन सार्वजनिक संसाधनों के प्रबंधन में एक बड़ी चूक का उदाहरण बन गया है, जहाँ विकास कार्य तो पूरे हो गए, लेकिन उनका वास्तविक उपयोग शुरू होने से पहले ही समाप्त हो गया।
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