लखनऊ 31 दिसंबर (आरएनएस )। समाज कल्याण विभाग में पारदर्शिता और पात्रता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत कोर्स समन्वयकों की भर्ती प्रक्रिया में हुई गंभीर अनियमितताओं पर कड़ा रुख अपनाया है। उनके निर्देश पर गोमतीनगर थाने में नियमों का उल्लंघन कर नियुक्तियां कराने वाली आउटसोर्सिंग कंपनी अवनी परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ तथा संबंधित अभ्यर्थियों के खिलाफ षड्यंत्र, फर्जी दस्तावेजों के प्रयोग और नियमविरुद्ध नियुक्ति के आरोपों में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पूरे प्रकरण में प्रशासनिक जांच के भी आदेश दिए गए हैं।राज्यमंत्री ने बताया कि 29 अक्टूबर 2025 को मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत प्रदेशभर में संचालित कोचिंग केंद्रों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से लगाए गए कोर्स समन्वयकों की भर्ती में अनियमितता की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विभागीय स्तर पर जांच कराई गई, जिसमें भर्ती से संबंधित सभी अभिलेखों और दस्तावेजों की गहन जांच की गई।जांच में सामने आया कि नियमों के अनुसार कोर्स समन्वयक पद के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य था, इसके बावजूद कई ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्त कर दिया गया जिन्होंने यह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी। कुल 69 अभ्यर्थियों की जांच में केवल 21 अभ्यर्थी ही पात्र पाए गए। जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि अपात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिलाने के लिए फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इस मामले में आउटसोर्सिंग कंपनी को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया है।राज्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी दस्तावेजों के सत्यापन की थी, उनकी भूमिका और लापरवाही की प्रशासनिक जांच कराई जाएगी। इसके साथ ही भविष्य में होने वाली सभी आउटसोर्सिंग नियुक्तियों में पुलिस सत्यापन और दस्तावेज सत्यापन अनिवार्य किया जाएगा। वर्तमान में कार्यरत सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का भी सत्यापन कराया जाएगा, ताकि मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और केवल पात्र अभ्यर्थियों को ही अवसर मिले।
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