दिसपुर ,02 जनवरी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के हित में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि असम देश का पहला राज्य बनेगा, जो 8वें राज्य वेतन आयोग का गठन करेगा। उन्होंने इसे कर्मचारी कल्याण की दिशा में एक अहम कदम बताते हुए असम की संवेदनशील और प्रगतिशील शासन व्यवस्था का प्रतीक करार दिया।
कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि असम सरकार अपने कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा, सम्मान और जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। 8वें राज्य वेतन आयोग के गठन का निर्णय इसी सोच का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग का उद्देश्य केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भत्तों, पेंशन और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यापक सिफारिशें देगा।
सोशल मीडिया पर किया ऐलान
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “असम देश का पहला राज्य होगा जो 8वें राज्य वेतन आयोग का गठन करेगा। यह कर्मचारी कल्याण और प्रगतिशील शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
समय पर लागू होंगी सिफारिशें
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य की प्रगति उसके कर्मचारियों के समर्पण से जुड़ी होती है। जब कर्मचारी सुरक्षित और प्रेरित होते हैं, तो शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वेतन आयोग की सिफारिशों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।
स्टेट पे कमीशन के दायरे में कौन?
गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा गठित स्टेट पे कमीशन राज्य के सरकारी कर्मचारियों पर लागू होता है। इसमें सरकारी विभागों के कर्मचारी, राज्य पुलिस, राज्य सरकार द्वारा संचालित संस्थानों के स्टाफ और पेंशनधारी कर्मचारी शामिल होते हैं। आयोग का काम कर्मचारियों के पे स्केल, भत्तों और पेंशन से जुड़े मामलों पर सिफारिशें देना होता है।
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