मेरठ 4 जनवरी (आरएनएस)। इंदौर में जहरीले पानी से हुई मौतों को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ गंभीर हुए हैं। उन्होंने सभी जिलों में पानी की गुणवत्ता चेक करने के निर्देश दिए हैं।
सीएम के निर्देश के बाद मेरठ निगम की नींद खुली है। सुबह निगम ने पेयजल की गुणवत्ता जांची, नलकूपों से पानी के नमूने लिए और टंकी में क्लोरीन डलवाया। अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार ने बताया कि रोजाना अभियान चलाया जाएगा। सभी टंकी की सफाई कराई जाएगी। क्लोरीन भी नियमित रूप डाला जाएगा। लापरवाही करने वाले कर्मचारी और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई भी निश्चित होगी।
गंगनहर स्थित भोले की झाल पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगा है। यहां से महानगर में विकासपुरी, सर्किट हाउस, शर्मा स्मारक, घंटाघर टाउन हॉल पर गंगाजल की आपूर्ति पहुंचती है। करीब पांच लाख की आबादी गंगाजल का प्रयोग करती है। जबकि अन्य आबादी को नगर निगम द्वारा पानी की टंकी, नलकूप और ट्यूबवेल से पेयजल सप्लाई होती है।
नगर निगम की लचर व्यवस्था के कारण लोगों को गंदा पानी का पीना पड़ता है। इसकी शिकायतें निगम में पार्षद और स्थानीय लोग लगातार करते हैं। शहर में पानी की पाइप लाइन कई जगहों सीवर लाइन के पास से होकर गुजरती है। पानी की पाइप लाइन लीकेज होने पर दूषित पेयजल लोगों के घरों पहुंचता है।
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