जौनपुर 5 जनवरी (आरएनएस )। 19वीं सदी में जब जिला व्यापारिक गतिविधियों का एक सक्रिय केंद्र था, उस समय मछलीशहर सिर्फ एक कस्बा नहीं बल्कि आसपास के इलाकों को जोडऩे वाला एक महत्वपूर्ण और सक्रिय मार्केट-प्वाइंट भी था, जिसकी व्यापारिक जिंदगी इलाहाबाद-जौनपुर सड़क से गहराई से जुड़ी हुई थी, सोर्सेज के अनुसार साल 1884 में इलाहाबाद से जौनपुर जाने वाली सड़क को एक पक्की सड़क के रूप में दर्ज किया गया है और इसी सड़क के जरिए मछलीशहर होते हुए समान दूर-दराज के इलाकों तक पहुँचता था और आसपास के क्षेत्रों से जरूरी सामान यहाँ आता था…..साल 1880-81 के सरकारी रिकॉर्ड में मछलीशहर के व्यापारिक ट्रैफिक को साफ तौर पर दर्ज किया गया है, जिससे उस दौर के व्यापार की तस्वीर सामने आती है….यहाँ व्यापारिक ट्रैफिक से मतलब इन सड़कों से होकर गुजरने वाले व्यापारिक सामान की मात्रा से है, जो एक जगह से दूसरी जगह ले जाया गया, ये आँकड़े मछलीशहर से जुड़ी सड़कों पर व्यापारिक माल की आवाजाही दिखाते हैं। उस दौर में व्यापारिक आवाजाही बैलगाडिय़ों तथा अन्य जानवरों के जरिए सड़कों पर होती थी, मुख्य सड़कों पर बनी चौकियों पर गुजरने वाले माल का वनज (मण में) और अनुमानित मूल्य दर्ज किया जाता था, यही जानकारी व्यापारिक ट्रैफिक के रूप में प्रकाशित हुई….जिसमें मछलीशहर से इलाहाबाद की ओर और इलाहाबाद से मछलीशहर की ओर भारी मात्रा में माल ढोया गया…इन आंकड़ों के अनुसार, इलाहाबाद से मछलीशहर की ओर, कुल लगभग 89,082 मण माल ढोया गया, और मछलीशहर से इलाहाबाद की ओर, कुल लगभग 1,46,389 मण माल ढोया गया….जिनमें कपास , अनाज, तेल, नमक, चीनी, लकड़ी, धातु तथा अन्य सामानों का कुल वजन हजारों मण में दर्ज किया गया…..मण एक पुरानी वजन मापने की इकाई है, जिसका इस्तेमाल पहले अनाज, कपास तथा अन्य दूसरे सामान को तौलने के लिए किया जाता था, आमतौर पर 1 मण लगभग 40 सेर (करीब 37.3 किलोग्राम) के बराबर माना जाता था…आँकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि मछलीशहर केवल उपभोक्ता कस्बा नहीं था, बल्कि यहाँ से हजारों मण सामान बाहर भी भेजा जाता था यानी यह इलाका आयात और निर्यात दोनों में सक्रिय था…….इस तरह कस्बा मछलीशहर लगभग 150 सालों से भी पहले से सड़क यातायात के जरिए न सिर्फ अपने आसपास के कस्बों से जुड़ा हुआ है, बल्कि दूर के बाजारों तथा व्यापारिक केंद्रों से भी संपर्क बनाए हुए है।।मछलीशहर के आयातदृनिर्यात से जुड़े ये तथ्य यह सिद्ध करते हैं कि यह कस्बा लंबे समय तक क्षेत्रीय व्यापारिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है…ऐसे ऐतिहासिक प्रमाण न केवल अतीत को समझने में सहायक हैं, बल्कि भविष्य की ऐतिहासिक व्याख्याओं के लिए भी एक मजबूत आधार प्रस्तुत करते हैं…।।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

