माघ मेला में दावों की खुली पोल, अव्यवस्थाओं के बीच कल्पवास व ठिठुरने को मजबूर श्रद्धालु
प्रयागराज 5 जनवरी (आरएनएस)। धर्म, आस्था और विश्वास का प्रतीक गंगा जमुना के संगम पर प्रतिवर्ष लगने वाला माघ मेला इस वर्ष प्रशासन के दावों के उलट अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ा। उक्त बातें पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने कहीं।
उन्होंने कहा कि संगम की रेती पर कल्पवास करने पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। अंधेरे में डूबे सेक्टर, मूलभूत सुविधाओं का अभाव
मेला क्षेत्र के विभिन्न सेक्टरों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कई शिविरों में अब तक बिजली की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई है। रात के समय मेला क्षेत्र के कई रास्ते अंधेरे में डूबे रहते हैं, जिससे बुजुर्गों और महिलाओं को आवागमन में भारी असुविधा हो रही है।
उन्होंने कहा कि अधूरे चकर्ड प्लेट और दलदल बना मार्ग हैं। कई मुख्य मार्गों पर प्लेटें धंसी हुई हैं, जिससे ई-रिक्शा और एम्बुलेंस के फंसने का खतरा बना रहता है। पाइप लाइनों में लीकेज की वजह से कई जगह रास्तों पर दलदल जैसी स्थिति बन गई है, जिससे पैदल चलना भी दूभर हो गया है।साफ-सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल
स्वच्छता के बड़े-बड़े विज्ञापनों के बीच, मेला क्षेत्र के दूरदराज के सेक्टरों में कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। अस्थायी शौचालयों की नियमित सफाई न होने से श्रद्धालुओं में संक्रामक बीमारियों का डर बना हुआ है। कड़ाके की ठंड के बावजूद कई प्रमुख चौराहों और घाटों पर पर्याप्त अलाव की व्यवस्था नहीं है।
सांसद प्रतिनिधि विनय कुशवाहा ने कहा कि पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने योगी सरकार से मांग किया है कि माघ मेला का फंड बढ़ाया जाए क्योंकि जिस तरह देश प्रदेश में प्रचार कर इतनी भीड़ इक_ा किया जा रहा है उसके सापेक्ष में फंड कम एलाट हुआ। जिसका नतीजा है कि अधिकारी फंड खत्म होने का बहाना बनाकर सुविधाओं में कटौती कर रहे हैं और मेला अव्यवस्था का शिकार हो रहा है। जैसे जैसे मुख्य स्नान पर्व आयेंगे भीड़ बढ़ेगी और अव्यवस्था होगी इसलिए तत्काल माघ मेला के लिए और फंड अवमुक्त किया जाय।
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