अखंड नगर/सुलतानपुर 5 जनवरी (आरएनएस )। एक तरफ जहाँ केंद्र और प्रदेश सरकार Óहर घर जलÓ और Óजल जीवन मिशनÓ के जरिए ग्रामीण अंचलों में शुद्ध पेयजल पहुँचाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की उदासीनता सरकार की इन मंशाओं पर पानी फेरती नजर आ रही है।
ताजा मामला जनपद के अखंड नगर विकासखंड अंतर्गत प्राणनाथपुर बछेडिया गांव का है, जहाँ एक बदहाल पड़ा हैंडपंप गांव में हुए Óकागजी विकासÓ की पोल खोल रहा है।
कागजों में रिपेयरिंग, जमीन पर सूखा गला
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान द्वारा हर वर्ष हैंडपंपों की रिपेयरिंग और रिबोर (त्मइवतम) के नाम पर सरकारी बजट से मोटी धनराशि निकाली जाती है। सरकारी अभिलेखों में तो हैंडपंप दुरुस्त दिखाए जाते हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि भीषण गर्मी और जरूरत के समय ये हैंडपंप शोपीस बने खड़े हैं।
विकास के दावों की खुली पोल
प्राणनाथपुर बछेडिया का यह हैंडपंप इस बात का जीता-जागता सबूत है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़ा है, जिससे पेयजल का संकट गहरा गया है। शिकायत के बावजूद प्रधान और पंचायत प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। सफाई और रखरखाव के अभाव में हैंडपंप के आसपास गंदगी का अंबार लगा है।
बड़ा सवाल: कहाँ जा रहा है बजट?
ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल पूछा है कि जब हर साल मरम्मत के नाम पर पैसा निकाला जाता है, तो आखिर वह पैसा जा कहाँ रहा है? क्या उच्चाधिकारी इस वित्तीय गबन और लापरवाही की जांच करेंगे? स्थानीय निवासियों ने जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और गांव में पेयजल की समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। यह स्थिति न केवल ग्रामीणों के हक पर डाका है, बल्कि सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट Óजल जीवन मिशनÓ की सफलता पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। देखना यह होगा कि खबर छपने के बाद कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन जागता है या ग्रामीण ऐसे ही बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते रहेंगे।
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