प्रयागराज 5 जनवरी (आरएनएस)। मध्यप्रदेश के इंदौर (भागीरथपुरा क्षेत्र) में प्रदूषित पेयजल से हुई जनहानि, महामारी फैलने एवं प्रशासनिक लापरवाही के संबंध में उच्चस्तरीय न्यायिक जाँच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई एवं पीडि़तों को मुआवज़ा प्रदान किए जाने के बाबत बहुजन सशक्तिकरण संघ (बीएसएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नानक चन्द्र ने गहरा रोष एवं चिंता व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों एवं प्रारंभिक जाँच से यह स्पष्ट हुआ है कि सीवेज युक्त पानी पेयजल पाइपलाइन में मिल गया, जिसके कारण डायरिया, हैजा एवं अन्य गंभीर जलजनित रोग फैले। यह घटना न केवल नगर निगम और जल आपूर्ति विभाग की घोर लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि तथाकथित स्वच्छ शहर के दावों के पीछे बहुजन, गरीब एवं श्रमिक बस्तियों की उपेक्षा की जा रही है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूर्व में भी जल गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की गईं, किंतु समय रहते न तो सुधार किया गया और न ही प्रभावी निगरानी तंत्र लागू किया गया।
बहुजन सशक्तिकरण संघ ने इस पूरे प्रकरण की माननीय उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जाँच कराई जाए। प्रदूषित जल से हुई प्रत्येक मृत्यु को राज्य की लापरवाही से हुई मृत्यु मानते हुए मृतक परिजनों को कम से कम ?25 लाख का मुआवज़ा दिया जाए बीमार एवं प्रभावित नागरिकों का नि:शुल्क, पूर्ण एवं दीर्घकालिक उपचार सुनिश्चित किया जाए।
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